विश्व समयपूर्वता दिवस पर नवजात शिशुओं की सुरक्षा व जागरूकता पर विशेष कार्यक्रमसंथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

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हर वर्ष 17 नवंबर को विश्व समयपूर्वता दिवस (World Prematurity Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल और जागरूकता को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर शुक्रवार को जिले के अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और सामाजिक संगठनों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका लक्ष्य समयपूर्व शिशुओं की चुनौतियों तथा उनके जीवन-रक्षण से जुड़ी आवश्यकताओं पर प्रकाश डालना रहा।

चिकित्सकों ने जानकारी दी कि समयपूर्व जन्म (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले) दुनिया भर में नवजात मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। ऐसे बच्चों को विशेष देखभाल, स्वच्छ वातावरण, तापमान नियंत्रण और पोषण सहायता की जरूरत होती है। विशेषज्ञों ने बताया कि सही समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप, माँ की नियमित प्रसवपूर्व जांच और परिवार की जागरूकता समयपूर्व बच्चों की जीवन रक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रमों के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने माताओं को कंगारू मदर केयर (KMC) यानी त्वचा से त्वचा संपर्क के लाभ, स्तनपान के महत्व और नवजात की संक्रमण से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया। कई संस्थानों ने विशिष्ट वार्डों में उपचार ले रहे नवजात बच्चों के परिजनों से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया।

जागरूकता रैलियों और परामर्श शिविरों में लोगों को बताया गया कि समयपूर्व बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, समय पर इलाज और लंबे समय तक चिकित्सा निगरानी ही उनके स्वस्थ भविष्य की कुंजी है।

विश्व समयपूर्वता दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि समयपूर्व जन्म कोई अभिशाप नहीं, बल्कि संवेदनशील देखभाल और चिकित्सा सहयोग से ऐसे बच्चे भी पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। समाज का जागरूक होना, स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत होना और मातृ-शिशु देखभाल पर ध्यान देना समयपूर्वता से होने वाले जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।

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