राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम: गलत धारणाओं को दूर करने की अपील

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के अवसर पर सोमवार को जिले में विभिन्न संगठनों, चिकित्सा संस्थानों और जागरूकता समूहों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य मिर्गी से संबंधित सामाजिक मिथकों को दूर करना, लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना रहा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि मिर्गी कोई अभिशाप या मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र से संबंधित) समस्या है, जिसका इलाज दवाओं और समय पर चिकित्सकीय परामर्श से संभव है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण मिर्गी के मरीज अक्सर भेदभाव के शिकार होते हैं, जिससे उनकी समस्या और बढ़ जाती है।

कार्यक्रमों के दौरान लोगों को बताया गया कि मिर्गी के दौरे के समय रोगी को सुरक्षित स्थान पर लिटाना, उसे भीड़ से दूर रखना और मुँह में कोई वस्तु न डालना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक उपचार है। कई स्वास्थ्य संस्थानों ने नि:शुल्क जांच शिविर, परामर्श केंद्र और जागरूकता रैलियों का आयोजन कर लोगों को विस्तृत जानकारी दी।

जागरूकता अभियान के आयोजकों ने कहा कि समाज में मिर्गी को लेकर फैले भ्रम को दूर करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी मरीज के साथ भेदभाव न करें और उसे सामान्य जीवन जीने में सहयोग दें।

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सही जानकारी, समय पर इलाज और समाज का सहयोग—मिर्गी जैसी बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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