रांची। झारखंड में पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता और कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के कथित आपराधिक गठजोड़ के मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को विस्तृत जांच के लिए आधिकारिक पत्र भेजा है। मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि यह गठजोड़ एक संगठित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसकी गतिविधियां राज्य की कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए गंभीर खतरा हैं।
पत्र में उठाए गए मुख्य बिंदु
मरांडी ने 16 नवंबर 2025 को भेजे गए दोनों पत्रों में कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया और इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। पत्र में कहा गया है कि:
1. अंतर्राष्ट्रीय हथियार और नकदी लेन-देन का नेटवर्क
मरांडी ने लिखा है कि विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का गिरोह पंजाब से मंगाए जा रहे अवैध हथियारों की खरीद में शामिल है। इन हथियारों की आपूर्ति पाकिस्तान की ओर से भेजे गए ड्रोन के माध्यम से होने की भी आशंका जताई गई है।
यह भी कहा गया है कि सिंडिकेट में शामिल लोग अंतर्राष्ट्रीय रैकेट, हवाला लेन-देन और मादक पदार्थों से जुड़े नेटवर्क से संपर्क में हैं।
2. पुलिस–अपराधी सांठगांठ का गंभीर आरोप
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि रांची पुलिस द्वारा की गई हालिया कार्रवाई में सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा और उनके निकट सहयोगियों से बरामद मोबाइल डेटा में कई संवेदनशील जानकारी मिली हैं।
इनमें कुछ ऐसे संपर्क और लेन-देन उजागर हुए हैं, जिनका संबंध पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता से जुड़ने का संकेत देते हैं।
3. KSS के गठन और संचालन में संदिग्ध भूमिका
मरांडी ने आरोप लगाया कि कोयलांचल शांति समिति (KSS)नामक संगठन की स्थापना और संचालन में अनुराग गुप्ता और रिया सिन्हा की अहम भूमिका रही है।
पत्र में दावा किया गया कि यह संगठन शांति समिति के नाम पर वसूली, विवाद निपटान और दबाव बनाने जैसे गैरकानूनी गतिविधियों को संरक्षण देने का माध्यम बना हुआ है।
4. अमन साहू मॉड्यूल से संभावित कनेक्शन
पत्र में यह भी उल्लेख है कि सुजीत सिन्हा गिरोह और अमन साहू मॉड्यूल के बीच संपर्क की आशंका है। अमन साहू पर हत्या, रंगदारी, फिरौती और अन्य कई बड़े अपराधों के जरिए उभरता गैंगस्टर होने के आरोप हैं।
मरांडी ने कहा कि इन मॉड्यूल के आर्थिक और आपराधिक हित एक दूसरे से जुड़े हो सकते हैं, जिसका खुलासा NIA जांच से हो सकता है।
5. राज्य की सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव व हस्तक्षेप की आशंका
अपनी चिट्ठी में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कई पुलिस अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से इस मामले में दबाव और हस्तक्षेप की शिकायतें की हैं, जिससे जांच प्रभावित होने की संभावना है।
उन्होंने लिखा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह जांच NIA जैसी स्वतंत्र और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी द्वारा ही की जानी चाहिए।
क्यों आवश्यक है NIA जांच?
मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला केवल संगठित अपराध का नहीं, बल्कि राज्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने लिखा कि इस सिंडिकेट की गतिविधियां राजकोषीय क्षति, हथियार खरीद, हथियार आपूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय संपर्क, पुलिस–अपराधी गठजोड़ और प्रशासनिक तंत्र पर प्रभाव डालने जैसे मामलों से जुड़ी हैं। अतः इसकी जांच केवल NIA ही कर सकती है।”
राजनीतिक हलचल तेज
NIA से जांच की मांग के बाद झारखंड का राजनीतिक तापमान भी बढ़ गया है। विपक्ष इसे सुरक्षा मसला बता रहा है, जबकि अब तक शासन पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा उठाया गया यह मामला झारखंड की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा ढांचे से जुड़ी कई गंभीर आशंकाओं को जन्म देता है। क्या NIA इस मामले में जांच करेगी? क्या वाकई पूर्व डीजीपी और अपराधियों के बीच नेटवर्क सक्रिय है? आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल और तेज होने की संभावना है।










