महाकवि कालिदास की जयंती पर श्रद्धांजलि, साहित्य और संस्कृति में अमर हैं उनके विचार

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।

प्राचीन भारत के महान संस्कृत साहित्यकार एवं नाटककार महाकवि कालिदास की जयंती बुधवार को श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। संथाल परगना क्षेत्र के विद्यालयों, साहित्यिक संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें उनके अमर कृतित्व और भारतीय संस्कृति में योगदान को याद किया गया।

महाकवि कालिदास को संस्कृत का ‘शेक्सपियर’ कहा जाता है। उन्होंने न केवल भारतीय काव्य परंपरा को नई ऊँचाइयाँ दीं बल्कि अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूतम्, कुमारसंभवम् और रघुवंशम् जैसी रचनाओं से विश्व साहित्य में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके साहित्य में प्रेम, प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

स्थानीय शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों ने कालिदास की कविताओं का वाचन किया और उनके जीवन दर्शन पर निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं। वक्ताओं ने कहा कि कालिदास केवल कवि नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन की आत्मा थे, जिन्होंने शब्दों के माध्यम से संस्कृति, आस्था और सौंदर्य का अद्वितीय चित्र खींचा।

संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक) ने इस अवसर पर महाकवि कालिदास जयंती पर उन्हें शत-शत नमन करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी साहित्य, संस्कृति और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।


Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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