विश्व निमोनिया दिवस पर जागरूकता अभियान, बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपील

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।

हर वर्ष 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस घातक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उससे बचाव के उपायों पर जनता को सचेत करना है। यह दिन विश्वभर में उन लाखों बच्चों की याद दिलाता है, जो समय पर इलाज या रोकथाम के अभाव में निमोनिया से अपनी जान गंवा देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निमोनिया एक गंभीर श्वसन रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के संक्रमण से होता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसके खतरे अधिक रहते हैं। झारखंड जैसे राज्यों में मौसम परिवर्तन और प्रदूषण के कारण निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ते देखे जाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, हर वर्ष लगभग 7 लाख से अधिक बच्चे विश्वभर में निमोनिया की वजह से अपनी जान गंवाते हैं, जबकि इनमें से अधिकतर मौतें जागरूकता और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण होती हैं।

साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने इस अवसर पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया। आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के माध्यम से बच्चों के टीकाकरण, साफ-सफाई और पोषण पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों ने कहा कि समय पर टीका लगवाना, हाथ धोने की आदत डालना और ठंड से बचाव निमोनिया से बचने के प्रभावी उपाय हैं।

संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक) ने जनता से अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, सर्दी-खांसी या तेज बुखार को हल्के में न लें, और निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच अवश्य कराएं। जागरूकता ही निमोनिया से बचाव का सबसे सशक्त उपाय है।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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