भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के पुरोधा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की पुण्यतिथि पर आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया। संथाल हूल एक्सप्रेस परिवार की ओर से भी इस महान शिक्षाविद् और समाजसेवी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
पंडित मदन मोहन मालवीय का नाम भारत की स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा जगत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उन्होंने जीवन भर देश की एकता, स्वाभिमान और शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य किया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना कर उन्होंने भारतीय शिक्षा को नई दिशा दी।
महामना केवल एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रभक्त, पत्रकार, विचारक और सामाजिक सुधारक भी थे। उनका जीवन आदर्श, अनुशासन और भारतीय संस्कारों की जीवंत मिसाल रहा। उन्होंने भारत की ज्ञान-संपदा, सांस्कृतिक धरोहर और नैतिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आज जब देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अग्रसर है, तब महामना के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनके शिक्षा दर्शन और राष्ट्रभक्ति की भावना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
संथाल हूल एक्सप्रेस ने उनके योगदान को नमन करते हुए कहा कि – “मदन मोहन मालवीय भारतीय ज्ञान-संपदा और सांस्कृतिक धरोहर की अद्वितीय मूर्त रूप हैं। उनका जीवन संदेश हमें सदैव राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।”
संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)
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