धनबाद। धनबाद के चर्चित सिंह मेंशन परिवार का बिहार के आरा से पुराना राजनीतिक और सामाजिक संबंध रहा है। ऐसे में धनबाद के मेयर संजीव सिंह का एक बार फिर आरा पहुंचना कोयलांचल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं।
मेयर संजीव सिंह बिहार के भोजपुर जिले स्थित आरा में रणवीर सेना के संस्थापक रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने ब्रह्मेश्वर मुखिया के पैतृक गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और आयोजित सभा में भाग लिया।
गौरतलब है कि संजीव सिंह के पिता एवं कोयलांचल के चर्चित श्रमिक नेता रहे सूर्यदेव सिंह ने भी आरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही उनका निधन हो गया था। उस चुनाव को लेकर आज भी आरा और धनबाद के पुराने राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाएं होती हैं। बताया जाता है कि उस समय धनबाद से बड़ी संख्या में समर्थक और वाहनों का काफिला चुनाव प्रचार के लिए आरा पहुंचा था।
इधर, मेयर बनने के बाद संजीव सिंह लगातार अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने में जुटे हुए हैं। उनकी सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। वहीं, धनबाद की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर सांसद ढुलू महतो के साथ कई मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी भी देखने को मिली है।
नीरज सिंह हत्याकांड में साक्ष्य के अभाव में बरी होने के बाद संजीव सिंह ने राजनीति में प्रभावशाली वापसी की। करीब आठ वर्षों तक जेल में रहने के बाद बाहर आने पर उन्होंने नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शेखर अग्रवाल को लगभग 31 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की पुण्यतिथि में संजीव सिंह की मौजूदगी महज एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। आरा दौरे की जानकारी स्वयं संजीव सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की है।
कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया
बिहार के भोजपुर जिले के खोपिरा गांव निवासी ब्रह्मेश्वर मुखिया रणवीर सेना के संस्थापक के रूप में जाने जाते थे। 1990 के दशक में बिहार में नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच बढ़ते संघर्ष के दौरान सितंबर 1994 में रणवीर सेना का गठन हुआ था। यह संगठन मुख्य रूप से भूमिहार किसानों की निजी सेना के रूप में चर्चित रहा। बाद में बढ़ती हिंसक घटनाओं के कारण राज्य सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
1 जून 2012 को ब्रह्मेश्वर मुखिया की आरा में मॉर्निंग वॉक के दौरान अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने उस समय पूरे बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।


