साहिबगंज। संथाल हूल एक्सप्रेस में प्रमुखता से प्रकाशित “खटिया बनी एंबुलेंस, खटिया बनी शव वाहन” खबर के बाद झारखंड की राजनीति भी गर्मा गई है। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने साहिबगंज जिले के राजमहल प्रखंड स्थित पीराचक गांव की घटना पर गहरा दुख जताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

मरांडी ने कहा कि पीराचक की घटना अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और झकझोर देने वाली है। उन्होंने कहा कि एक गर्भवती महिला की सिर्फ इसलिए जान चली गई क्योंकि गांव तक सड़क नहीं थी और समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं साहिबगंज जिले से आते हैं, लेकिन राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी उनके जिले के एक गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई। यदि मुख्यमंत्री के अपने जिले की यह स्थिति है, तो राज्य के अन्य सुदूर इलाकों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से इस घटना की जवाबदेही तय करने तथा पीराचक सहित ऐसे सभी गांवों को अविलंब पक्की सड़क से जोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में किसी परिवार को अपने प्रियजन को खोना पड़े, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।
गौरतलब है कि संथाल हूल एक्सप्रेस ने सोमवार के अंक में “खटिया बनी एंबुलेंस, खटिया बनी शव वाहन” शीर्षक से पीराचक गांव की जमीनी हकीकत को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में सड़क के अभाव में गर्भवती महिला को खटिया पर अस्पताल ले जाने और मौत के बाद शव को भी कीचड़ भरे खेतों के बीच खटिया पर गांव लाने की विवशता को प्रमुखता से उठाया गया था।










