राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर विशेष

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद: आधुनिक भारत की शिक्षा क्रांति के शिल्पी

संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

आज पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिवस भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती पर समर्पित है। शिक्षा को समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार मानने वाले मौलाना आज़ाद ने स्वतंत्र भारत में शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद रखी।

उन्होंने कहा था—

“शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य इंसान के मस्तिष्क और आत्मा का विकास है।”

आधुनिक भारत की शैक्षिक संरचना—
✔ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना
✔ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) की नींव
✔ विज्ञान शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण पर विशेष जोर
✔ सर्वसुलभ शिक्षा की अवधारणा

—इन सबके केंद्र में मौलाना आज़ाद की दृष्टि और प्रतिबद्धता रही।


शिक्षा ही सशक्त भारत का मार्ग

मौलाना आज़ाद का मानना था कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को मजबूत बनाने के लिए
समान, गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक शिक्षा आवश्यक है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आज भारत शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयां छू रहा है।


अधिकार और अवसर: हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों सहित देश के सभी वर्गों तक शिक्षा उपलब्ध कराना—
आज भी हमारे सामाजिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हमें याद दिलाता है कि—
📌 शिक्षा सिर्फ पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि
📌 अधिकार, अवसर और आत्मनिर्भरता की कुंजी है


नमन उस महान विचारक को

संथाल हूल एक्सप्रेस मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के शिक्षा-समर्पित योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन करता है और संकल्प लेता है कि—
हम शिक्षा की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचाएंगे जो अब भी अंधेरे में हैं।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

Leave a Comment

और पढ़ें