नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोंसाल्वेस लौरेंको के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की, जो भारत के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की अंगोला की पहली राजकीय यात्रा है। यह यात्रा 8 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर तक चलेगी और अंगोला की आजादी के 50वें वर्षगांठ समारोह के साथ मेल खाती है।दोनों देशों के नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बुनियादी ढांचा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई।

द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय
इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की ओर से अंगोला के विकास में एक विश्वसनीय भागीदार बनने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह प्रतिबद्धता भारत-आफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के व्यापक ढांचे के तहत भी लागू होगी। मई 2025 में अंगोला के राष्ट्रपति लौरेंको की भारत यात्रा के बाद यह दूसरी बड़ी बातचीत है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को पिछले चार दशकों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचाया।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर वार्ता के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला मछली पालन, जलीय कृषि और समुद्री संसाधनों में सहयोग पर केंद्रित है, जबकि दूसरा वाणिज्य दूतावास मामलों से संबंधित है। ये कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए हैं।
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भारतीय प्रतिनिधिमंडल भारतीय पक्ष में जल शक्ति और रेलवे के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, सांसद परभुभाई नागरभाई वासवा और डी. के. अरुणा, साथ ही वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने अंगोला के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए चर्चा की और आगामी परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व अंगोला भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो अपनी तेल और हीरे की आपूर्ति के लिए जाना जाता है। भारत को अंगोला से कच्चा तेल आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा अफ्रीकी देश है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार पर तेल की कीमतों का गहरा प्रभाव पड़ता है। 2012-13 में यह व्यापार 7.16 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा था, जो 2019-20 में 3.93 अरब डॉलर तक कम हो गया। इस यात्रा के दौरान रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में 200 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन को अंतिम रूप देने की भी घोषणा की गई है, जो आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।

भारत-आफ्रीका संबंधों का विस्तार राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारत की अफ्रीकी महाद्वीप के साथ बढ़ती साझेदारी का हिस्सा है। भारत ने हाल के वर्षों में G20 में अफ्रीकी संघ को सदस्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंगोला के साथ संबंध इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहायता पर केंद्रित है। विशेषज्ञ राय विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा भारत के लिए अफ्रीका में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक पैठ मजबूत करने का अवसर है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग न केवल आर्थिक लाभ प्रदान करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देगा। आगामी कार्यक्रम राष्ट्रपति मुर्मू 11 नवंबर को अंगोला की संसद को संबोधित करेंगी और इसके बाद 11 से 13 नवंबर तक बोत्सवाना की यात्रा पर रहेंगी, जहां रक्षा और विकास सहयोग पर ध्यान केंद्रित होगा। यह यात्रा भारत और अंगोला के बीच संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास है, जो दोनों देशों के लिए आपसी लाभ और वैश्विक मंच पर सहयोग के नए अवसर खोलेगी। इस ऐतिहासिक मुलाकात से दोनों देशों के नागरिकों को आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लाभ मिलने की उम्मीद है।









