राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रतीक लौह पुरुष को नमन

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची/नई दिल्ली। भारत की एकता के शिल्पकार और लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (31 अक्टूबर) को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थानों की ओर से देश की अखंडता, सुरक्षा और सामूहिक विकास के संकल्प को दोहराया गया।

स्वतंत्र भारत के विशाल और विविधतापूर्ण भूभाग को एक राष्ट्र के सूत्र में पिरोने में सरदार पटेल की भूमिका ऐतिहासिक रही। रियासतों के विलय और प्रशासनिक एकीकरण के ज़रिये उन्होंने आधुनिक भारत की नींव मजबूत की।


सरदार पटेल: एकता के शिल्पकार

भारत की 562 से अधिक रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र का निर्माण

दृढ़ नेतृत्व, अद्वितीय निर्णय क्षमता और राष्ट्रहित सर्वोपरि की नीति

किसानों के हक और लोकतांत्रिक मूल्यों के सशक्त पक्षधर

देश की सुरक्षा और एकजुटता के लिए उनके निर्णायक योगदान की वजह से ही उन्हें लौह पुरुष की उपाधि मिली।


स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — उनकी विरासत का प्रतीक

गुजरात स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व और देशभक्ति का प्रतीक मानी जाती है। लाखों पर्यटक हर वर्ष यहां पहुंच पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

राष्ट्रीय एकता दिवस को मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को यह संदेश देना है कि—

“भारत की शक्ति उसकी एकता में है।”

शैक्षणिक संस्थानों में एकता दौड़, जनजागरूकता कार्यक्रम, शपथ ग्रहण और देशभक्ति आधारित गतिविधियाँ आयोजित की गईं।


संथाल हूल एक्सप्रेस की ओर से विशेष श्रद्धांजलि

संपूर्ण संथाल परगना और झारखंड में भी इस दिन को ससम्मान मनाया गया। संथाल हूल एक्सप्रेस ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा—
“देश की अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखना ही सरदार पटेल के सपनों का सच्चा सम्मान है।”


लौह पुरुष के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि—
राष्ट्र पहले… बाकी सब बाद में।

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Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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