भारत के महान समाज सुधारक, निर्भीक सत्याग्रही और वेदों के मर्मज्ञ महर्षि दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर पूरा राष्ट्र कृतज्ञ श्रद्धासुमन अर्पित करता है। 19वीं सदी में जब भारतीय समाज कई कुरीतियों, अंधविश्वासों और सामाजिक बुराइयों से जकड़ा हुआ था, तब महर्षि दयानंद सरस्वती एक तेजस्वी प्रकाशपुंज बनकर उभरे और समाज को एक नई दिशा दी।
“वेदों की ओर लौटो” का दृढ़ संदेश
महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को टंकारा (गुजरात) में हुआ। उन्होंने भारतीय समाज को मूल वेदिक ज्ञान की ओर लौटने का आह्वान किया।
उनका प्रसिद्ध नारा “वेदों की ओर लौटो” केवल धार्मिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का आधार बना।
उन्होंने मूर्तिपूजा, जातिगत ऊंच-नीच, बाल विवाह, पर्दा प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और शिक्षा, महिला सशक्तीकरण तथा समानता के सिद्धांत को जन-जन तक पहुंचाया।
आर्य समाज की स्थापना और राष्ट्रवादी चेतना
साल 1875 में महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की।
यही संस्था आगे जाकर स्वतंत्रता आंदोलन का एक मजबूत स्तंभ बनी।
लाला लाजपत राय, स्वामी श्रद्धानंद, पंडित गुरुदत्त, आदी महान स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा महर्षि दयानंद से ही मिली।
आर्य समाज के विद्यालयों और गुरुकुलों ने राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत आधार दिया।
निडर, अदम्य और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन
महर्षि दयानंद का जीवन संघर्षों से भरा रहा, परंतु सत्य और राष्ट्रहित की राह पर चलते हुए उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सत्य पर दृढ़ रहने की उनकी भावना उनके प्रसिद्ध वाक्य में झलकती है:
“सत्य को स्वीकार करो और असत्य को त्याग दो।”
30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में उनका देहावसान हुआ।
उनकी मृत्यु भी उनके सत्याग्रह के सिद्धांतों का परिणाम मानी जाती है—उन्होंने कभी अपने आदर्शों के आगे समझौता नहीं किया।
आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक
महर्षि दयानंद की शिक्षा:
✅ समानता का अधिकार
✅ महिलाओं को शिक्षा और सम्मान
✅ वैज्ञानिक सोच और स्वदेशी भावना
✅ सत्य और नैतिकता पर आधारित समाज
आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी उनके समय में थीं।
महर्षि दयानंद सरस्वती केवल एक धार्मिक आचार्य नहीं थे, बल्कि भारत के सामाजिक व वैचारिक पुनर्जागरण के महानायक थे।
उनकी पुण्यतिथि पर संथाल हूल एक्सप्रेस परिवार उन्हें शत-शत नमन करता है और उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है।
📌 रिपोर्ट : संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)









