हर साल 30 अक्टूबर को विश्वभर में “विश्व बचत दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को बचत की आदत विकसित करने, वित्तीय प्रबंधन के प्रति जागरूक करने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व को समझाना है।
आज के समय में जब खर्चों की भरमार है और आय के स्रोत सीमित, ऐसे में योजनाबद्ध बचत ही व्यक्ति, परिवार और समाज—तीनों की आर्थिक मजबूती का आधार बनती है।
विश्व बचत दिवस का इतिहास
विश्व बचत दिवस (World Savings Day) की शुरुआत वर्ष 1924 में हुई, जब इटली के मिलान में अंतर्राष्ट्रीय बचत बैंक कांग्रेस (International Savings Bank Congress) का आयोजन हुआ।
इसका मुख्य संदेश था:
“बचत करें और सुरक्षित भविष्य बनाएं।”
तब से यह दिवस हर वर्ष दुनिया भर में मनाया जाता है, ताकि लोग अपने कल के लिए आज से तैयारी कर सकें।
बचत क्यों है जरूरी?
✅ आर्थिक संकट में सहारा
✅ आपातकालीन स्थिति में मदद
✅ भविष्य की योजनाओं (शिक्षा, घर, सेवानिवृत्ति) के लिए निवेश
✅ वित्तीय स्वतंत्रता
✅ ऋण के बोझ से बचाव
आज डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, ऑनलाइन एफडी/आरडी, म्यूचुअल फंड्स जैसे विकल्प बचत को अधिक आसान और सुरक्षित बनाते हैं।
भारत में बचत का स्वरूप
भारत सदियों से बचत की संस्कृति वाला देश रहा है।
परिवार और समाज की संरचना में बचत को हमेशा प्राथमिकता दी गई — चाहे वह गुल्लक के सिक्के हों या बैंक जमा।
सरकार भी कई योजनाओं के माध्यम से बचत को प्रोत्साहित कर रही है —
📌 जन धन योजना
📌 सुकन्या समृद्धि योजना
📌 पीपीएफ
📌 पोस्ट ऑफिस सेविंग्स
📌 एनपीएस इत्यादि
आज का संदेश — खर्च कम, बचत ज्यादा
पोस्टर में दिया संदेश आज के समय का सबसे बड़ा वित्तीय मंत्र है:
“जीवन में आगे बढ़ना है, तो खर्चों को कम और बचत को बढ़ाना है।”
स्मार्ट खर्च और नियमित बचत मिलकर ही एक स्थिर और समृद्ध जीवन की ओर ले जाते हैं।
निष्कर्ष
विश्व बचत दिवस हमें यह याद दिलाता है कि बचत न केवल आदत है, बल्कि जीवन जीने की समझदारी भी है।
एक छोटी-सी शुरुआत भी भविष्य में बड़े बदलाव की वजह बन सकती है।
आज ही संकल्प लें—
✅ थोड़ी-थोड़ी सही, पर नियमित बचत शुरू करें
✅ अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं
✅ आर्थिक रूप से मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दें
📌 रिपोर्ट: संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)









