रांची/पटना। लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान झारखंड और बिहार में एक बड़ा दुखद हादसा सामने आया है। दोनों राज्यों के विभिन्न जिलों में नदियों और तालाबों में डूबने से कुल 133 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता हैं।
झारखंड में मौतों का सिलसिला:
झारखंड के सात जिलों में कम से कम 27 लोगों की डूबने से मौत हो गई। अधिकांश हादसे श्रद्धालुओं के द्वारा अर्घ्य देते समय खतरनाक क्षेत्रों में चले जाने के कारण हुए। हजारीबाग जिले की एक व्रती, पम्मी देवी (26), की अर्घ्य स्नान के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। कोडरमा में एक अन्य व्रती, उमेश यादव (40), की कुंडा आहर में डूबने से मौत हो गई।
राज्य में हुए अन्य प्रमुख हादसों में शामिल हैं:
· जमशेदपुर: चांडिल के स्वर्णरेखा नदी घाट पर संजय यादव (45) समेत तीन लोगों की डूबकर मौत।
· गिरिडीह: जिले के विभिन्न घाटों पर कम से कल छह लोगों की डूबने से मौत, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं।
· पलामू: सोन नदी में तीन युवकों की डूबने से मौत, जबकि एक लापता है।
बिहार में भीषण त्रासदी:
बिहार मेंस्थिति और भी भीषण रही, जहाँ राज्य के 30 जिलों में कुल 106 लोगों की डूबकर मौत हो गई है। अभी भी लगभग 10 लोग लापता हैं। सबसे ज्यादा मौतें पटना (11), नालंदा (8) और वैशाली (7) जिलों में दर्ज की गई हैं। उत्तर बिहार के कई जिलों में भी हादसे हुए हैं।
प्रशासनिक चेतावनी पर ध्यान न देना एक कारण:
इन हादसोंने एक बार फिर छठ घाटों पर सुरक्षा उपायों और जागरूकता की कमी को रेखांकित किया है। प्रशासन द्वारारा बार-बार खतरनाक क्षेत्रों में न जाने की चेतावनी के बावजूद, कई श्रद्धालु गहरे पानी में चले गए, जिसके कारण ऐसी दुर्घटनाएं हुईं।
यह घटना त्योहार के मौके पर हुई एक बहुत बड़ी त्रासदी है, जिसने सैकड़ों परिवारों को शोक में डाल दिया है। लापता लोगों की तलाश जारी है।









