संथाल हूल एक्सप्रेस, झारखंड —
आज पूरी सिख संगत और श्रद्धालु समाज श्री गुरु रामदास जी की जयंती श्रद्धा, प्रेम और भक्ति के साथ मना रहा है। गुरु रामदास जी, सिख धर्म के चौथे गुरु, न केवल एक आध्यात्मिक नेता थे, बल्कि सेवा, विनम्रता और प्रेम के साकार रूप थे।
???? अमृतसर की नींव रखने वाले दयालु गुरु
गुरु रामदास जी ने 1577 ईस्वी में पवित्र नगर “रामदासपुर” की स्थापना की थी, जिसे आज पूरी दुनिया अमृतसर के नाम से जानती है। यही वह स्थान है जहाँ बाद में उनके उत्तराधिकारी गुरु अर्जन देव जी ने हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) का निर्माण कराया — जो आज सिख आस्था का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है।
????️ विनम्रता और सेवा का संदेश
गुरु रामदास जी का जीवन संदेश था —
“जिसे ईश्वर की सेवा करनी है, उसे पहले मानवता की सेवा करनी चाहिए।”
उन्होंने निःस्वार्थ सेवा (सेवा भाव) और संगत-पंगत की परंपरा को आगे बढ़ाया, जहाँ सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग समान रूप से बैठकर भोजन करते हैं।
उनकी वाणी “गुरुग्रंथ साहिब” में संकलित है, जिसमें प्रेम, एकता और मानव कल्याण का संदेश निहित है।
???? भक्ति और समाज सुधार का संगम
गुरु रामदास जी ने समाज में फैली ऊँच-नीच, भेदभाव और धार्मिक कट्टरता को समाप्त करने के लिए लोगों को एक ईश्वर की उपासना और समानता का मार्ग दिखाया।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में झलकती है।
???? संथाल हूल एक्सप्रेस की ओर से श्रद्धांजलि
“गुरु रामदास जी की शिक्षाएँ हमें विनम्रता, करुणा और समानता का मार्ग दिखाती हैं।
उनकी जयंती पर संथाल हूल एक्सप्रेस परिवार की ओर से शत्-शत् नमन।” ????
????संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)
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