????️ पांडुरंग शास्त्री आठवले जयंती: गीता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने वाले युगप्रवर्तक संत को शत्-शत् नमन

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संथाल हूल एक्सप्रेस, झारखंड —

मानवता, आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक पांडुरंग शास्त्री आठवले (दादा जी) की जयंती पर आज पूरे देश में श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। उन्होंने अपने जीवन में “स्वाध्याय परिवार” की स्थापना कर समाज में गीता के ज्ञान, आत्मबल और ईश्वर में विश्वास का संदेश फैलाया।


???? आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक

पांडुरंग शास्त्री आठवले केवल एक धार्मिक प्रवचनकार नहीं थे, बल्कि एक ऐसे फिलॉसफर, समाज सुधारक और विचारक थे जिन्होंने लोगों को बताया कि “भगवान हर व्यक्ति के भीतर हैं।”
उनकी यह शिक्षा केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक समरसता, श्रम की गरिमा और आत्मसम्मान को जीवन का आधार बना दिया।


???? स्वाध्याय आंदोलन — एक वैचारिक क्रांति

1950 के दशक में शुरू हुआ उनका स्वाध्याय आंदोलन एक वैचारिक और सामाजिक क्रांति था। इस आंदोलन ने लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनने, समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और ‘ईश्वर सर्वत्र है’ की भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी।
उनका मानना था कि —

“निर्भयता स्वयं में विश्वास और ईश्वर में आस्था का परिणाम है।”


???? गीता का संदेश और विश्व मंच पर पहचान

आठवले जी ने भगवद्गीता के संदेश को केवल भारत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे विश्व स्तर पर “मानवता का दर्शन” बनाकर प्रस्तुत किया। उनके कार्यों की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई। उन्हें Templeton Prize (1997) सहित कई सम्मान प्राप्त हुए।


???? जयंती पर श्रद्धांजलि

स्वाध्याय परिवार और उनके अनुयायियों ने आज “दादा जी” की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

“दादा जी ने सिखाया कि ईश्वर बाहर नहीं, हमारे भीतर है —
और जब मनुष्य अपने भीतर के ईश्वर को पहचान लेता है, तो वही समाज बदलने की शक्ति बन जाता है।”


????संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)

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Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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