पारंपरिक कार्यों की सीमाओं को तोड़ ग्रामीण महिलाएं बन रहीं स्वावलंबन की मिसाल

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हुनर के बल पर पशु सखी दीदियां कर रहीं सेवा, बकरियों को दे रही टीका व दवा

हिरणपुर (संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता)।

पारंपरिक चूल्हा-चौका जैसे घरेलू कार्यों से आगे बढ़ते हुए अब ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड में पलाश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षित होकर महिलाएं “पशु सखी” की भूमिका में पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।

इन आजीविका पशु सखी दीदियों द्वारा गांव-गांव जाकर बकरियों को कृमिनाशक दवाएं देना और टीकाकरण करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे जहां पशुओं की मृत्यु दर में कमी आ रही है, वहीं महिलाएं आर्थिक रूप से भी स्वावलंबी बन रही हैं।

ग्रामीण समाज में इन दीदियों की बढ़ती भूमिका यह दर्शाती है कि महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास में भागीदार बन रही हैं।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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