बाबूजी से सीखा हर संघर्ष में अडिग रहना” — फादर्स डे पर हेमंत सोरेन का भावुक संदेश

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सौरभ राय
संथाल हूल एक्सप्रेस विशेष संवाददाता

रांची:हर साल जून का तीसरा रविवार हमें याद दिलाता है उन मजबूत कंधों की, जिन्होंने हमें चलना सिखाया, जो हमारे पहले शिक्षक, पहले मार्गदर्शक और सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत रहे हमारे पिता। और जब बात एक ऐसे पिता की , जिन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि एक पूरे राज्य के लिए संघर्ष किया हो, तो भावनाएं और भी गहराई से जुड़ जाती हैं जी हा हम बात कर रहे हैं दिशोम गुरु शिबू सोरेन और उनके पुत्र सह राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के रिश्ते की ।

फादर्स डे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भावनात्मक पोस्ट

फादर्स डे 2025 के मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन को एक बेहद भावुक संदेश के साथ नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें शिबू सोरेन गंभीर और विचारमग्न मुद्रा में नज़र आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ हेमंत ने लिखा:”पिता एक ऐसा वटवृक्ष हैं जिनकी छांव में आत्मविश्वास पलता है,और जड़ों से मिली सीख से,जीवन का हर पल सार्थक हो जाता है…

मेरे गुरु, मेरे मार्गदर्शक हैं मेरे बाबा आदरणीय दिशोम गुरुजी।

यह पंक्तियां सिर्फ एक बेटे का पिता के लिए प्रेम नहीं था, बल्कि एक पीढ़ी द्वारा संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने की स्वीकारोक्ति भी थी।

एक पिता, जो सिर्फ परिवार के नहीं, पूरे राज्य के लिए लड़े

शिबू सोरेन, जिन्हें झारखंड में ‘गुरुजी’ के नाम से जाना जाता है, ने उस दौर में आवाज़ उठाई जब आदिवासियों की पीड़ा को कोई नहीं सुनता था। उन्होंने सिर्फ राजनीति नहीं की — उन्होंने एक आंदोलन खड़ा किया। उनके संघर्षों ने झारखंड को एक अलग पहचान दी, और उनके नेतृत्व ने राज्य को सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान की राह दिखाई।

हेमंत सोरेन आज जिस मुकाम पर हैं, उसका आधार उनके पिता की सीख और संघर्ष ही है। और फादर्स डे का यह संदेश एक बार फिर ये दर्शाता है कि राजनीति से परे, पिता-पुत्र का रिश्ता भावनाओं, आदर्शों और साझा जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है।

भावनाएं जो शब्दों से बड़ी होती हैं

हेमंत सोरेन का यह छोटा-सा पोस्ट झारखंड के लोगों के दिलों को छू गया। हजारों की संख्या में लोगों ने इसे साझा किया, प्रतिक्रिया दी और गुरुजी के योगदान को याद किया। यह सिर्फ एक नेता द्वारा पिता को दी गई बधाई नहीं थी, यह उस धरोहर को सलाम था जिसे शिबू सोरेन ने अपने जीवन भर संजोया।

एक सीख, एक प्रेरणा

फादर्स डे पर यह भावुक पल हमें यह सिखाता है कि हमारी पहचान सिर्फ हमारी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन मूल्यों और संस्कारों से बनती है जो हमें हमारे माता-पिता से मिलते हैं। शिबू सोरेन की छाया में पले-बढ़े हेमंत सोरेन आज झारखंड का नेतृत्व कर रहे हैं — यह सिर्फ राजनीति की निरंतरता नहीं, बल्कि एक विचारधारा की यात्रा है।

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