रांची, झारखंड – झारखंड के प्रांतीय महामंत्री राकेश कुमार द्वारा रचित ‘गोदान (काव्य रूपांतरण)’ पुस्तक का लोकार्पण आगामी शनिवार को किया जाएगा। यह पुस्तक प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेमचंद की महान कृति ‘गोदान’ का एक अद्वितीय काव्यमय रूपांतरण है, जो पाठकों को गहराई तक छूने वाला अनुभव प्रदान करता है। लोकार्पण समारोह का आयोजन रांची रेलवे स्टेशन रोड स्थित प्रभात प्रकाशन के सभाकक्ष में होगा।
इस समारोह में प्रमुख अतिथियों में शामिल होंगे पद्मश्री बलबीर दत्त, साहित्यकार डॉ. अशोक प्रियदर्शी, डॉ. मयंक मुरारी, डॉ. राकेश कुमार सिंह और डॉ. अरुण सज्जन। समारोह का संचालन रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थी विद्यावैभव भारद्वाज करेंगे।
पुस्तक की विशेषताएँ
‘गोदान’ में नायक होरी की व्यक्तित्व को एक नये कलेवर में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। राकेश कुमार का यह रूपांतरण होरी की संघर्ष भरी जिंदगी को न केवल दर्शाता है, बल्कि उसे एक धीरोदात्त नायक का दर्जा भी प्रदान करता है। होरी, जो जीवन की अनेक कठिनाइयों में झीलता हुआ, अंततः अपने अस्तित्व का परिचय देता है, यह दिखाता है कि असल पराजय में भी विजय का एक रूप छिपा होता है।
पुस्तक में कुछ भावुक पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
“क्या श्रद्धा का मोल नहीं कुछ, सोचे वह खटिया पर लेट।
क्यों अभाव में भाव सदा ही, चढ़ता मयार्दा की भेंट?”
ये शब्द होरी की आत्मा की गहराई को उजागर करते हैं और उसके संघर्ष को और भी वास्तविकता में लाते हैं। राकेश कुमार ने अपने काव्यमय रूपांतरण में श्रम और प्रेम की वास्तविकता को जीवन के रंगों के साथ मिलाकर प्रस्तुत किया है।
‘गोदान’ के इस नव रूप में न केवल साहित्य की महत्ता को पुनर्जीवित किया गया है, बल्कि जनमानस में जागरूकता और संवेदनशीलता को भी जागृत करने की कोशिश की गई है। यह लोकार्पण समारोह न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर है, बल्कि यह प्रेमचंद की अनमोल कृति को एक नये दर्शक वर्ग के सामने लाने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह पुस्तक और उसका लोकार्पण समारोह साहित्यिक संसार में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में उभर रहा है, जिससे झारखंड में साहित्य की समृद्धि और संवर्धन में योगदान देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया गया है।









