व्यवस्था की बेरुखी से नाराज ग्रामीण, आजादी को मुंह चिढ़ाती गरमरा की प्यास

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संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता

हजारीबाग: आजादी के सात दशक बाद भी यदि किसी गांव के लोग एक घूंट साफ पानी के लिए तरस रहे हों, तो यह विकास के तमाम दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी गांव गरमरा की स्थिति कुछ ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर पेश कर रही है। यहां इंसान और जानवर एक ही गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं।

करीब 25 आदिवासी परिवारों और लगभग 250 की आबादी वाले इस गांव में पेयजल संकट बेहद गंभीर हो चुका है। ग्रामीण जंगल किनारे बने एक कूपनुमा गड्ढे यानी ‘चुआं’ के सहारे अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। यही गड्ढा गांव की प्यास बुझाने का एकमात्र साधन बन गया है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव तक सड़क तो बन गई, लेकिन पानी की सरकारी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। गांव में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई जलमीनार महीनों से खराब पड़ी है। उसका मोटर बंद हो चुका है और अब वह केवल शोपीस बनकर रह गई है।

गांव में लगे दो चापाकलों में से एक पूरी तरह खराब हो चुका है, जबकि दूसरा कुछ ही मिनट पानी देने के बाद हवा छोड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों के पास जंगल किनारे बने गड्ढे से पानी लाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।

करीब 800 मीटर के दायरे में फैले इस आदिवासी टोले के पश्चिमी छोर पर स्थित यह गड्ढा गांव की लाइफलाइन बन चुका है। इसी दूषित पानी का इस्तेमाल ग्रामीण पीने, नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने के लिए करते हैं। यही पानी जानवर भी पीते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गड्ढे के ठीक बगल में आदिवासियों का श्मशान घाट भी स्थित है।

ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही जंगल से जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है। अंधेरे में पानी लाने जाना किसी जोखिम से कम नहीं होता, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि डर से ज्यादा प्यास भारी पड़ती है।

दूषित पानी पीने के कारण गांव में पेट दर्द, डायरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। अधिकांश ग्रामीण खेतिहर मजदूर हैं, जो रोजी-रोटी के लिए हजारीबाग शहर जाते हैं। दिनभर मेहनत के बाद घर लौटने पर उन्हें आराम नहीं, बल्कि पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

व्यवस्था की बेरुखी से नाराज ग्रामीण महेंद्र मांझी, कार्तिक मांझी, दिनेश मांझी, करमा मांझी, जीवलाल मांझी, संझली देवी, सुविस्तरा देवी, मानसी कुमारी, सीतामुनी देवी, रीना देवी, बड़की देवी, तालो देवी, सोनिया देवी, बुधनी देवी और रूपमनी मरांडी समेत अन्य ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव की पेयजल समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

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