अपहरण कांड की जांच में लापरवाही, भ्रष्टाचार और अभियुक्तों को बचाने के आरोप में सख्त कदम
📍 बोकारो/रांची
झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बोकारो पुलिस प्रशासन ने पिण्ड्राजोरा थाना में पदस्थापित 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई में 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई), 2 हवलदार और 11 आरक्षी शामिल हैं।
यह कार्रवाई 24 जुलाई 2025 को दर्ज एक अपहरण मामले की जांच में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद की गई है। मामले में खुंटाडीह गांव निवासी रेखा देवी ने अपनी 18 वर्षीय पुत्री कुमारी पुष्पा महतो के अपहरण की प्राथमिकी पिण्ड्राजोरा थाना में दर्ज कराई थी।
प्रारंभिक जांच के दौरान ही थाना स्तर पर कार्यप्रणाली संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी जानबूझकर मामले को कमजोर कर रहे थे और अभियुक्त को लाभ पहुंचाने की मंशा से साक्ष्यों के साथ लापरवाही बरती गई। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी अभियुक्तों के संपर्क में थे, उनके साथ उठना-बैठना और पार्टी करना तक सामने आया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर मृतका के कंकाल अवशेष, पहने हुए कपड़े तथा हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला अपहरण से आगे बढ़कर हत्या का था।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि थाना की गोपनीयता का उल्लंघन किया गया और आरोपी को बचाने के उद्देश्य से आर्थिक लेन-देन के संकेत भी मिले हैं। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बोकारो ने कड़ी कार्रवाई करते हुए थाना के सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबित कर्मियों को नियमों के तहत सामान्य जीवन यापन भत्ता पर रखा गया है तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह कार्रवाई झारखंड पुलिस के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है, जहां एक ही थाना के इतने बड़े स्तर पर पुलिसकर्मियों पर एक साथ गाज गिरी है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि विभाग अब लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
इस पूरे प्रकरण ने पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है, वहीं आम जनता के बीच यह संदेश भी गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।







