रांची | संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
झारखंड में गिग इकोनॉमी से जुड़े हजारों श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गिग श्रमिक (पंजीकरण एवं कल्याण) विधेयक–2025 को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही राज्य में गिग श्रमिक कल्याण बोर्ड के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
इस कानून के लागू होने से राज्य के 50 हजार से अधिक गिग श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें जोमैटो, स्विगी, अमेजन से जुड़े डिलीवरी पार्टनर, कैब और ऑटो चालक, ई-कॉमर्स वर्कर और अखबार हॉकर जैसे श्रमिक शामिल हैं।
गिग श्रमिकों को मिलेगी कानूनी पहचान
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य गिग श्रमिकों को कानूनी पहचान देना और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा की ठोस व्यवस्था करना है। इसके तहत गठित होने वाला गिग श्रमिक कल्याण बोर्ड श्रमिकों का पंजीकरण करेगा, उनकी समस्याओं की सुनवाई करेगा और उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ेगा।
यदि कोई एग्रीगेटर (कंपनी या प्लेटफॉर्म) तय नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
इन सुविधाओं का मिलेगा लाभ
नए कानून के तहत गिग श्रमिकों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं—
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दुर्घटना बीमा
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स्वास्थ्य सुविधाएं
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मातृत्व लाभ
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न्यूनतम पारिश्रमिक की व्यवस्था
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शिक्षा सहायता
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वृद्धावस्था सुरक्षा
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जरूरत पड़ने पर ऋण सुविधा
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कौशल विकास प्रशिक्षण
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अंतिम संस्कार सहायता
गिग वर्कर्स को मिलेंगे ये अहम अधिकार
इस कानून के जरिए गिग श्रमिकों को कई अधिकार भी सुनिश्चित किए गए हैं—
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समय और दूरी के आधार पर न्यूनतम पारिश्रमिक
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सरल और स्पष्ट भाषा में अनुबंध
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किसी भी समस्या या शिकायत के लिए सीधा कल्याण बोर्ड से संपर्क
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आपातकालीन सहायता
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शिक्षा से जुड़ी योजनाएं
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बुजुर्ग अवस्था में सामाजिक सुरक्षा
हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून गिग इकोनॉमी में काम करने वाले श्रमिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा। अब तक असंगठित और असुरक्षित माने जाने वाले गिग वर्कर्स को पहली बार सरकारी संरक्षण और अधिकारों की ढाल मिलेगी।









