नई दिल्ली। केंद्र सरकार जल्द ही देश के कस्टम सिस्टम में बड़े पैमाने पर सुधार लागू करने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि कस्टम स्ट्रक्चर में होने वाला यह परिवर्तन आने वाले वर्षों का सबसे बड़ा आर्थिक रिफॉर्म साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है, ताकि व्यापारियों और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और देरी की समस्या का सामना न करना पड़े।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि कस्टम सिस्टम में बदलाव व्यापार परिवहन और बिजनेस प्रोसेस को तेज़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। सुधारों का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना, क्लीयरेंस प्रक्रिया को सहज बनाना और अनुपालन को सरल करना है। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों में कस्टम ड्यूटी रेट में चरणबद्ध तरीके से कमी की गई है, जिससे विदेशी व्यापार और घरेलू उद्योग को मजबूती मिली है। आने वाले सुधार इस दिशा को और गति देंगे।
सूत्रों के अनुसार, नए मॉडल में डिजिटल इंटरफेस, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, आसान डॉक्यूमेंटेशन और त्वरित अप्रूवल सिस्टम शामिल किए जा सकते हैं। इससे न सिर्फ कारोबारियों के समय की बचत होगी, बल्कि आयात-निर्यात की लागत में कमी आने की भी उम्मीद है। वर्तमान कस्टम व्यवस्था में कई स्तरों पर क्लियरेंस की जटिलताएँ व्यापारियों के लिए चुनौती बनी रहती हैं, जिन्हें यह सुधार काफी हद तक कम कर सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, निर्यात को बढ़ावा देने और देश में विदेशी निवेश आकर्षित करने की क्षमता रखता है। सरकार का ध्यान Ease of Doing Business को और मजबूत करने पर है, ताकि भारत वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर सके।
व्यापार जगत इस घोषणा को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है और उम्मीद जता रहा है कि लागू होने वाले नए नियम आयात-निर्यात से जुड़े कार्यों में सुगमता और गति लाएंगे। अब उद्योग जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब आधिकारिक तौर पर विस्तृत ड्राफ्ट और क्रियान्वयन का खाका जारी करती है।
यह सुधार लागू होने की स्थिति में कस्टम सेक्टर में एक नया ढांचा स्थापित कर सकता है, जो आने वाले वर्षों में भारत के व्यापारिक विकास की गति को और तेज करेगा।









