संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क। नई दिल्ली।
विवादित कारोबारी विजय माल्या ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर माल्या ने लिखा कि सरकार और बैंक जनता को अब तक गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने पूछा, “कब तक भारत सरकार और बैंक मुझे और जनता को धोखा देते रहेंगे?”
माल्या ने दावा किया कि वित्त मंत्री संसद में कह रहे हैं कि उनसे 14,100 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि बैंक का कहना है कि 10,000 करोड़ रुपये वसूले गए। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों आंकड़ों में 4,000 करोड़ रुपये का अंतर क्यों है और इसका कोई स्पष्ट विवरण क्यों नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता पर निशाना साधते हुए कहा कि सच्चाई जानने के लिए एक रिटायर्ड जज की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। माल्या ने इस पूरी स्थिति को “दुखद और चिंताजनक” बताते हुए आरोप लगाया कि जनता को सच्चाई से दूर रखा जा रहा है।
माल्या की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में फिर से बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारतीय बैंकिंग व्यवस्था, ऋण वसूली और भगोड़े आर्थिक अपराधियों से जुड़े कानूनों पर भी सवाल खड़े करता है।









