संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
भारतीय सिनेमा और खेल जगत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले दारा सिंह को आज उनकी जन्म जयंती पर पूरे देश में याद किया जा रहा है। 19 नवंबर 1928 को अमृतसर के धर्मूचक गांव में जन्मे दारा सिंह का असली नाम दिदार सिंह रंधावा था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आगे बढ़कर उन्होंने दुनिया को यह दिखाया कि मेहनत, अनुशासन और लगन के साथ कोई भी असंभव को संभव बना सकता है।
दारा सिंह ने बतौर रेसलर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपार सफलता हासिल की। वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी ‘रुस्तम-ए-ज़मां’ के नाम से मशहूर हुए। उनकी ताकत और फुर्ती ने उन्हें दुनिया के बड़े-बड़े पहलवानों के बीच एक अलग पहचान दिलाई। रेसलिंग में अपनी खास जगह बनाने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया और यह सफर भी शानदार रहा। वर्ष 1952 में फिल्म ‘संगदिल’ के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाले दारा सिंह ने अपने करियर में करीब 200 से अधिक फिल्मों में काम किया।
दारा सिंह की लोकप्रियता उस समय और भी बढ़ गई, जब उन्होंने धार्मिक धारावाहिकों में भगवान हनुमान की भूमिका निभाई। उनकी व्यक्तित्व, कद-काठी और स्वाभाविक अभिनय ने इस किरदार को जीवंत बना दिया। दर्शकों के बीच उन्हें वास्तविक हनुमान का रूप माना जाने लगा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग उनकी भक्ति, आस्था और शक्ति से भरी अदाकारी के मुरीद हो गए। उनकी इस छवि ने उन्हें घर-घर में सम्मान और प्यार दिलाया।
फिल्म उद्योग में दारा सिंह की यात्रा केवल एक अभिनेता तक सीमित नहीं रही। वे एक सफल निर्माता, निर्देशक और सांसद भी रहे। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से लोगों के बीच एक मजबूत छाप छोड़ी। उनके जीवन की सादगी तथा विनम्रता ने उन्हें और भी महान बना दिया। देश भर में आज भी लोग उन्हें शक्ति, समर्पण और भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में याद करते हैं।
दारा सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत, उनकी प्रेरणा और उनका शानदार योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रभावित करता रहेगा। भारत के इस महान सपूत को उनकी जयंती पर सिनेमा जगत और खेल प्रेमी हृदय से नमन कर रहे हैं।








