हर वर्ष नवंबर माह के तीसरे गुरुवार को विश्वभर में विश्व दर्शन दिवस (World Philosophy Day) मनाया जाता है। यह दिवस यूनेस्को द्वारा मानव सभ्यता को समृद्ध बनाने वाले दर्शन, तर्क, चिंतन, नैतिकता और ज्ञान की परंपराओं को सम्मान देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। दर्शन केवल विचार का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन के व्यवहार, समाज, संस्कृति और भविष्य को दिशा देने वाली मूलभूत शक्ति है।
दर्शन ने सदियों से समाज को यह समझाने का कार्य किया है कि मनुष्य कैसे जिए, कैसे सोचे और दुनिया को किस नज़रिए से देखे। इसी कारण विश्व दर्शन दिवस मानवता को यह संदेश देता है कि विचारों की स्वतंत्रता, संवाद, तर्कशीलता और सहिष्णुता किसी भी सभ्यता की सबसे बड़ी धरोहर हैं।
वर्तमान परिवेश में जब दुनिया तीव्र तकनीकी परिवर्तन, सामाजिक तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे समय में दर्शन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह हमें सीखाता है कि विचारों की विविधता ही समाज की शक्ति है, और बेहतर भविष्य के लिए शांतिपूर्ण संवाद तथा नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है।
राजनीति, विज्ञान, कला, शिक्षा और सामाजिक जीवन—हर क्षेत्र में दर्शन हमें संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है। युवाओं के लिए तो यह एक आधार है, जो उन्हें तार्किक सोच, विवेकशीलता और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ता है।
विश्व दर्शन दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और समाज में विचार-विमर्श और तर्कपूर्ण संवाद को बढ़ावा दें। पुस्तकें, शोध, अध्ययन, चर्चा और ज्ञान का साझा होना ही इस दिवस का प्रमुख संदेश है।
आज के दिन हम यह संकल्प लें कि हम ज्ञान, नैतिकता, विवेक और न्याय के सिद्धांतों को अपने जीवन और समाज दोनों में स्थान देंगे, ताकि एक बेहतर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील दुनिया का निर्माण हो सके।
— संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक)









