संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी समुदाय के गौरवशाली इतिहास में भगवान बिरसा मुंडा का नाम अमर है। हर वर्ष 15 नवंबर को उनकी जयंती पूरे देश, विशेषकर झारखंड में, बड़े सम्मान के साथ मनाई जाती है। बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के महानायक थे।
बिरसा मुंडा ने उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ उलगुलान (महाआंदोलन) का नेतृत्व किया। तीर-कमान के दम पर उन्होंने न केवल अंग्रेजों को चुनौती दी, बल्कि आदिवासी समाज में आत्मसम्मान, एकता और अधिकारों के लिए नई चेतना का संचार किया। उनकी लड़ाई भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की नींव को मजबूत करने वाली ऐतिहासिक घटनाओं में शामिल है।
उनका संदेश आज भी आदिवासी समाज ही नहीं, समस्त भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बिरसा मुंडा ने समाज को शोषण के विरुद्ध खड़ा होने, अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने और एक संगठित, स्वाभिमानी समाज निर्माण का मार्ग दिखाया।
झारखंड के गठन दिवस के साथ मनाई जाने वाली बिरसा मुंडा जयंती राज्य की पहचान और इसकी समृद्ध विरासत की याद दिलाती है। इस विशेष अवसर पर प्रदेशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पद यात्राएं और सामाजिक जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।
संथाल हूल एक्सप्रेस भगवान बिरसा मुंडा को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता है और उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। उनका संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान सदैव हमारी राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करता रहेगा।









