झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL पेपर लीक मामले में फैसला सुरक्षित रखा, आरोप लगाने वाले को CID का नोटिस

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रांची । झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक के मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश पर विचार करना शुरू किया। इस फैसले से परीक्षा प्रक्रिया के भविष्य और जारी कानूनी कार्यवाही की दिशा तय होने की उम्मीद है।

आरोप लगाने वाले अभ्यर्थियों को CID का नोटिस

इस बीच, एक महत्वपूर्ण विकास में, राज्य अपराध अनुसंधान शाखा (CID) ने उन दो अभ्यर्थियों, कुणाल प्रताप सिंह और प्रकाश पोद्दार को नोटिस जारी किया है, जो लगातार इस पेपर लीक की शिकायत करते रहे हैं। CID ने यह नोटिस कांड संख्या 02/2025 के तहत जारी किया है, जो JSSC द्वारा दर्ज कराया गया एक मामला है।

आयोग का आरोप है कि कुछ लोगों ने पेपल लीक से जुड़ी गलत व भ्रामक जानकारी फैलाकर संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है।

पूर्व की गिरफ्तारी और मामले की पेचीदगी

इसी मामले में, झारखंड सरकार के एक अधिकारी संतोष मस्ताना को पहले ही CID ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्री मस्ताना ने खुद अदालत में इस मामले से जुड़े कुछ सबूत, जिनमें व्हाट्सएप चैट भी शामिल हैं, पेश किए थे।

मामले की एक और पेचीदगी यह है कि जिन दो अभ्यर्थियों – दीपिका कुमारी और मनीष – के बयानों के आधार पर संतोष मस्ताना की गिरफ्तारी हुई थी, वे दोनों ही इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता (इंटरवेनर) हैं और बताया जाता है कि वे इस परीक्षा में सफल भी रहे हैं।

अब क्या?

अब सभी की निगाहें झारखंड हाईकोर्ट के उस आसन्न फैसले पर टिकी हैं, जो न केवल इस विवादित परीक्षा का भविष्य तय करेगा, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों को भी परिभाषित करेगा। यह फैसला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।


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