संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
धनबाद। झारखंड के बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड मामले में नया मोड़ तब आया जब निचली अदालत से बरी किए गए झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने झारखंड उच्च न्यायालय की शरण ली है। मृतक नीरज सिंह के भाई अभिषेक सिंह, मृतक चालक घल्टू महतो की पत्नी तथा मृतक अशोक यादव की पत्नी ने अलग-अलग अपील याचिकाएं हाई कोर्ट में दाखिल की हैं।
सूत्रों के अनुसार तीनों याचिकाओं को अनरजिस्टर्ड केस सूची में रखते हुए इनके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी अपीलों में निचली अदालत द्वारा संजीव सिंह सहित 10 आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
निचली अदालत ने किया था साक्ष्य के अभाव में बरी
इस मामले में वर्ष 2024 में निचली अदालत ने सुनवाई के बाद साक्ष्य के अभाव में संजीव सिंह समेत 10 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ पीड़ित पक्ष न केवल संजीव सिंह बल्कि जैनेंद्र कुमार सिंह उर्फ पिंटू सिंह समेत सभी 10 व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाते हुए हाई कोर्ट पहुंचा है। साथ ही राज्य सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
करीब 8 वर्षों तक जेल में रहे थे संजीव सिंह
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने से पहले संजीव सिंह लगभग 8 वर्ष तक जेल में बंद रहे।
लोअर कोर्ट की सुनवाई पूरी होने पर सभी आरोपी बरी कर दिए गए, जिसके बाद पीड़ित परिवारों ने इस निर्णय पर असहमति जताते हुए उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है।
2017 में हुई थी हत्या, पूरे शहर में फैला था सनसनी का माहौल
28 मार्च 2017 को धनबाद के तत्कालीन डिप्टी मेयर नीरज सिंह अपने घर लौट रहे थे कि अचानक सरायढेला थाना क्षेत्र के समीप घात लगाए हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी।
इस हमले में —
✅ नीरज सिंह
✅ उनके चालक घल्टू महतो
✅ निजी सुरक्षा कर्मी अशोक यादव एवं एक अन्य सहयोगी
की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घटना के बाद संजीव सिंह ने स्वयं पुलिस के सामने सरेंडर किया था।
हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
अब लोअर कोर्ट के फैसले को चुनौती मिलने के बाद न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई अहम बिंदु फिर से सामने आ सकते हैं। पूरा धनबाद और झारखंड की राजनीति की नजर इस केस पर टिकी है।









