संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
आज देशभर में भाई दूज का पावन पर्व बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला यह पर्व परिवारों में खुशियों और अपनापन का संदेश लेकर आता है।
???? भाई दूज का महत्व:
भाई दूज का पर्व भारतीय संस्कृति में रक्षा और स्नेह की अद्भुत परंपरा का परिचायक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को सुरक्षा और सम्मान का वचन देते हैं। यह पर्व सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बंधन का उत्सव है, जो परिवारिक एकता और प्रेम को और मजबूत करता है।
???? पौराणिक संदर्भ:
पुराणों के अनुसार, यमराज की बहन यमुनाजी ने इस दिन अपने भाई को तिलक लगाकर स्वागत किया था और उनके दीर्घायु होने की कामना की थी। इस परंपरा से प्रेरणा लेकर ही हर साल कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज मनाया जाता है।
???? कैसे मनाया जाता है त्योहार:
सुबह स्नान-ध्यान के बाद बहनें थाल सजाती हैं —
जिसमें रोली, चावल, दीपक, मिठाई और फूलों की थाली रहती है।
भाई को तिलक लगाकर आरती उतारी जाती है, और फिर मिठाई खिलाकर
उनके स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु की कामना की जाती है।
भाई भी बदले में उपहार या आशीर्वाद स्वरूप कुछ भेंट देते हैं।
???? भाई-बहन के रिश्ते की अनोखी मिसाल:
भाई दूज का पर्व उस अनकहे रिश्ते की कहानी है,
जहाँ प्यार शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से व्यक्त होता है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि परिवार ही सबसे बड़ी ताकत है —
जहाँ अपनापन, सहयोग और स्नेह ही जीवन की असली पूँजी हैं।
???? संदेश:
“भाई दूज सिर्फ तिलक का त्योहार नहीं,
यह भरोसे और प्रेम की अमर परंपरा है।”
संथाल हूल एक्सप्रेस परिवार की ओर से
आप सभी को भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आपका जीवन खुशियों, सौहार्द और प्रेम की रोशनी से सदा आलोकित रहे। ????✨
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