कोल कर्मियों के लिये बल्ले – बल्ले, अब देश के 44 अपोलो हॉस्पिटल में मिलेगी इलाज की सुविधा

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धनबाद : कोयला कामगारों के लिए अच्छी खबर है। कोल इंडिया ने अपने पचासवें साल का उत्सव मना रहा है। ऐसे में उसकी ताकत कोयला कर्मचारी है। उन्हें बेहतर सुविधा कैसे मिले इसको लेकर उच्च प्रबंधन ने कई कल्याणकारी निर्णय लिए है। कोल इंडिया के मौजूदा 2.20 लाख कर्मी व साढ़े पांच लाख सेवानिवृत्त कर्मियों व उनके आश्रित परिजन को अब अपोलो अस्पताल में सीधे इलाज कर सकेंगे। कोल इंडिया लिमिटेड और अपोलो हॉस्पिटल्स के बीच गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस एमओयू के तहत कोयला कर्मचारियों और सेवानिवृत्त को भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा। एमओएमओयू के दौरान कोल इंडिया के निदेशक मानव संसाधन डॉ. विनय रंजन, अपोलो हॉस्पिटल्स के अध्यक्ष डॉ. पीसी रेड्डी, प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी की उपस्थित थी।
इस समझौते की खास बात यह है कि सीजीएचएस दर के बजाय टैरिफ आधारित बिलिंग पर इलाज होगा। अपोला सीजीएचएस दर पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। इसी कारण वे कोल इंडिया के पैनल में भी नहीं शामिल था। अपोलो से किसी को लौटना नहीं पड़ेगा। अपोलो के 44 हॉस्पिटल्स में इलाज की सुविधा मिलेगी।
इस समझौते की खास बात यह है कि सीजीएचएस दर के बजाय टैरिफ आधारित बिलिंग पर इलाज होगा।

कोल इंडिया कर्मचारियों के लिए कर रही बेहतर काम : डॉ. विनय रंजन

कोल इंडिया निदेशक मानव संसाधन डॉ. विनय रंजन ने गुरुवार को कहा कि कोयला कर्मचारियों के बेहतरी के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। अपोलो अस्पताल में इलाज को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा था। अपोलो अस्पताल में कर्मियों को इलाज के व्यवस्था नहीं थी।कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवा बेहतर हो इसको लेकर प्रबंधन लगातार प्रयास में लगा रहता है। कोल इंडिया के इतिहास में पहली बार एमओयू रेट पर इलाज होगी। अपोलो हॉस्पिटल्स के साथ एक ऐतिहासिक सहयोग पर गर्व है। इससे कर्मियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलेगी। अपोलो के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल कोल इंडिया के स्वास्थ्य सेवा स्थापित करेगी।
कोल इंडिया की झारखंड में पांच इकाई
कोल इंडिया की झारखंड में पांच इकाई है। बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल, सीएमपीडीआईएल, आईआईसीएम है। बीसीसीएल में 31584, सीसीएल 32887, ईसीएल 46146, सीएमडीआईएल 2996, आईआईसीएम में करीब सौ। वहीं, करीब सवा लाख से अधिक सेवानिवृत्त कर्मी हैं।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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