संथाल हुल एक्सप्रेस संवाददाता, रामगढ
एक ओर पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन का गहरा दुःख, दूसरी ओर राज्य की जिम्मेदारियों का निर्वहन — मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी पुत्रधर्म और राजधर्म का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
नेमरा स्थित पैतृक आवास से कर रहे शासन संचालन
मुख्यमंत्री इन दिनों रामगढ़ जिला के नेमरा गांव स्थित अपने पैतृक आवास में रहकर पारंपरिक विधि-विधान से दिवंगत पिता के श्राद्ध कर्म निभा रहे हैं। इसके साथ-साथ वे राज्य के प्रशासनिक कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। शासन-प्रशासन से जुड़े जरूरी फाइलों का निपटारा कर रहे हैं और वरीय पदाधिकारियों से निरंतर संवाद में हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि राज्य के आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में कोई कोताही न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा – “बाबा को दिए वचनों को निभा रहा हूं। वे हमेशा कहते थे कि जनसेवा ही सर्वोच्च धर्म है। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनके दिखाए रास्ते पर चलना ही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है।”
मुख्यमंत्री ने खेतों में पहुंचकर देखा धान रोपनी का कार्य
इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज अपने गांव के आसपास के खेतों में चल रहे धान रोपनी कार्य का निरीक्षण किया। वे खुद धान रोपनी करती महिलाओं के बीच पहुंचे, उनसे संवाद किया और खेती-किसानी के हालात की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा – “कृषि सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, हमारी संस्कृति, अस्मिता और पहचान का हिस्सा है। जब किसान खुशहाल होगा, तभी राज्य समृद्ध होगा। सरकार किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।”
किसानों ने भी मुख्यमंत्री के बीच पहुंचने पर प्रसन्नता जताई और अपनी समस्याएं रखीं, जिनके समाधान का मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया।
पारंपरिक श्रद्धा और भावनाओं से निभाई भोजन परोसने की रस्म
आज दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म का चौथा दिन था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परंपरा के अनुसार बाबा को भोजन परोसने की धार्मिक रस्म निभाई। यह रस्म स्थानीय मान्यताओं के अनुसार आत्मा की शांति के लिए की जाती है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बताया कि – “बाबा हमेशा संस्कृति और परंपरा के पक्षधर थे, उन्हें श्रद्धांजलि देना तभी संभव है जब हम उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करें।”
राज्यहित सर्वोपरि – जनता से मिला संबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता ने जिस तरह दुःख की इस घड़ी में मेरे और मेरे परिवार के साथ खड़े होकर हौसला बढ़ाया, उससे मुझे यह ताकत मिली कि मैं इन विषम परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर पा रहा हूं।









