एनटीपीसी के खिलाफ कट ऑफ डेट को लेकर दिए जा रहे महाधरना में पहुंचे निरसा विधायक अरुण चटर्जी

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संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता

हजारीबाग : एनटीपीसी के खिलाफ युवा विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले कट ऑफ डेट को लेकर दिए जा रहे अनिश्चितकालीन महाधरना के तीसरे दिन निरसा विधायक अरुप चटर्जी पहुंचे और अपना समर्थन जताते हुए कहा कि यह परियोजना आंदोलन को दबा कर पुलिस फौज खड़ा कर चालू किया गया जिसकी लड़ाई की चिंगारी आज भी गांव में दबी है जिसे सिर्फ सुलगाने की आवश्यकता है और आप लोग ने इसकी शुरुआत किया है। और लड़ाई कभी दो कदम आगे दो कभी एक कदम पीछे होती है लेकिन कभी खत्म नहीं होती। हमलोग सरकारी परियोजनाओं का विरोधी नहीं हैं देश मे उर्जा की जरुरतों को पुरा करने के लिए कोयला जरुरी है लेकिन रैयतों व ग्रामिणों को बेहतरीन मुआवजा, नौकरी व विस्थापन का लाभ मिलें नहीं तो विस्थापित झारखंड से गायब हो जाएंगे।
कंपनी पहले के दर से जमीन का मुआवजा व विस्थापन का लाभ दे रही जो ग़लत है ईसीएल, बीसीसीएल में 1980-90 के दशक में जमीन देकर नौकरी लिए लेकिन अभी जमीन का रजिस्ट्री कर रहे है तो अभी जो सरकार का दर है उस दर के अनुसार रैयत मुआवजा ले रहे हैं। यहां भी कंपनी को वर्तमान दर के अनुसार जमीन व घर का मुआवजा देना होगा यह नियम भी है। कंपनी जरुर झुकेगी लड़ाई जारी रखना होगा अगर कंपनी बोलती है कि राज्य सरकार देंगी तो हमलोग राज्य सरकार से भी अभी के समय से विस्थापन का लाभ व मुआवजा दिलवायेंगे। साथ ही उन्होंने जुलाई में विधानसभा के कार्यकाल में बात को उठाकर बहस कराने आश्वासन दिया
इस मौके पर उन्होंने कहा कि एनटीपीसी के एमडीओ थ्रिवैणी- सैनिक को धनबाद में भी ठेका मिला है यह बड़ी कंपनी है और मजदूरों को 10-12 देकर काम करवा रही है ये कहीं ना कहीं मजदूरों का शोषण कर रही है और एसपीसी के वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है अगर ये लोग एकजूट होकर लड़ाई लड़ेंगे तो इन्हें एचपीसी के अनुसार वेतन दिलाने का काम करेंगे क्योंकि हम जेबीसीसीआई के सदस्य हैं। आगे उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार जल्द 1 से डेढ़ महीने में विस्थापन आयोग का गठन करेंगी जिससे विस्थापितों की समस्या का हल किया जाएगा। वहीं क्षेत्र का दौरा कर मजबूती से लड़ाई लड़ने की बात भी कही। धरना स्थल पर मुख्य रूप से संचालन कर रहे लखेनद्र ठाकुर, जिप प्रतिनिधि इब्राहिम, समाजसेवी मनोज गुप्ता, सोनू इराकी, रामदुलार गुप्ता, सुनिता साहु, कैलाश साव व अन्य लगभग सैकड़ों लोग शामिल थे।

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