संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले रांची की PMLA विशेष अदालत और झारखंड हाईकोर्ट भी उनकी डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर चुके थे।
इसके बाद आलमगीर आलम ने आरोपों से मुक्त किए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
ED की चार्जशीट में कमीशन वसूली का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल चार्जशीट में आलमगीर आलम पर ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर से जुड़े कथित कमीशन वसूली के मामले में आरोप लगाए गए हैं।
ED के मुताबिक, उनके ग्रामीण विकास मंत्री रहने के दौरान निर्माण कार्यों के टेंडर में ठेकेदारों से तय व्यवस्था के तहत कमीशन की कथित वसूली की जाती थी। जांच एजेंसी ने इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया है।
जांच में करोड़ों रुपये की वसूली का दावा
ED की चार्जशीट के अनुसार, कथित कमीशन वसूली के जरिए कुल 37.55 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई थी। एजेंसी ने अपनी जांच में इस रकम और उससे जुड़े लोगों के बारे में कई दावे किए हैं।
मामले की जांच के दौरान आलमगीर आलम को मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उनके निजी सचिव संजीव लाल और उसके करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों पर भी ED ने छापेमारी की थी। रिपोर्टों के अनुसार, जहांगीर आलम के ठिकाने से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी।
डिस्चार्ज याचिका खारिज, कानूनी लड़ाई जारी
डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का मतलब यह है कि इस स्तर पर आलमगीर आलम को मामले से आरोपमुक्त करने की मांग स्वीकार नहीं की गई। वहीं, मामले में आरोप और ED के दावे अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आलमगीर आलम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को चुनौती दी है। इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।








