बाबूलाल मरांडी बोले- विवादित और दागी अफसरों पर ही मेहरबानी क्यों?

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से राज्य की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल किए हैं।

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में ईमानदार और बेदाग अधिकारियों की कमी नहीं है, इसके बावजूद महत्वपूर्ण, संवेदनशील और भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच वाले पदों पर विवादों और आरोपों से घिरे अधिकारियों को जिम्मेदारी क्यों दी जाती है।

https://x.com/yourBabulal/status/2090647479507091486

डीजीपी पद को लेकर सरकार पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में सिर्फ एक अधिकारी को छोड़कर यूपीएससी की ओर से अनुशंसित अधिकारियों में से किसी को डीजीपी नहीं बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि जिस एक अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई, उन्हें भी समय से पहले पद से हटा दिया गया।

मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि अखिल भारतीय सेवा के नियमों की अनदेखी करते हुए एक के बाद एक सेवानिवृत्त अधिकारियों को डीजीपी पद पर बनाए रखने की स्थिति क्यों बनी। उन्होंने पूछा कि क्या डीजीपी का पद अब संवैधानिक जिम्मेदारी के बजाय राजनीतिक कृपा का पद बन गया है?

राजनीतिक दबाव और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि किसी अधिकारी को यह महसूस होने लगे कि उसकी कुर्सी कानून के बजाय सत्ता की कृपा से सुरक्षित है, तो उसके सामने कानून के अनुसार काम करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम करने की स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने सीआईडी और एसीबी जैसी जांच एजेंसियों का भी जिक्र किया। मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि इन महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों की कमान विवादित अधिकारियों के हाथों में होगी तो जनता उनकी निष्पक्षता पर कैसे भरोसा करेगी।

पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की अपील

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन सरकारों के फैसलों का हिसाब इतिहास जरूर रखता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस किसी सरकार या नेता की निजी जागीर नहीं, बल्कि संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह संस्था है। इसलिए ईमानदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए और कानून को सत्ता से ऊपर रखा जाना चाहिए।

मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी सुधार का समय है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि झारखंड में पुलिस और प्रशासन कानून के अनुसार काम करें, न कि राजनीतिक दबाव या किसी की कृपा के आधार पर।

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