रघुवर दास बोले- प्रतियोगी परीक्षाओं की गड़बड़ी की CBI जांच से कम कुछ मंजूर नहीं

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार से युवाओं के साथ कथित धोखेबाजी और राजनीति बंद करने की अपील करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े पूरे मामले की CBI जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में मुद्दा सिर्फ घोटाले की जांच का नहीं, बल्कि जांच में घोटाले का भी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं—जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द करना, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और पूरे मामले की CBI जांच कराना।

JPSC PT परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 9 अगस्त को JPSC PT परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब JPSC में वर्तमान में न अध्यक्ष हैं और न ही सदस्य, तो परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना कौन जारी करेगा।

उन्होंने दावा किया कि JPSC अध्यक्ष और परीक्षा कंट्रोलर जेल में हैं और ऐसी स्थिति में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी।

अपने कार्यकाल की परीक्षाओं का किया बचाव

रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं का बचाव करते हुए कहा कि उस दौरान किसी परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली या भ्रष्टाचार को लेकर छात्रों का आंदोलन नहीं हुआ।

उन्होंने छठी JPSC परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी के अंकों को जोड़ने के सैद्धांतिक निर्णय को लेकर तकनीकी विवाद का उल्लेख किया, लेकिन कहा कि उस समय सीट बेचने या बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार जैसे आरोप नहीं लगे थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि यदि वर्ष 2019 में सत्ता संभालने के बाद उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, तो अब तक उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई।

CGL अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिलने का दावा

रघुवर दास ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी बताए जाने वाले आर्किटेक्ट विनोद सिंह के घर ED की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में CGL अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले थे। उन्होंने कहा कि इसी तरह के आरोपों के कारण छात्रों के बीच CBI जांच की मांग और मजबूत हुई है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का उल्लेख रघुवर दास के बयान में नहीं किया गया है।

राहुल गांधी के पत्र का भी किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को वैध माना है।

रघुवर दास ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों की मांग वैध है तो राज्य सरकार उनकी मांग के अनुरूप CBI जांच क्यों नहीं करा रही है।

उन्होंने राहुल गांधी के रांची नहीं आने को लेकर भी सवाल उठाया और दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें रांची नहीं आने की सलाह दी है। रघुवर दास ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी के रांची आने की स्थिति में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के चार मंत्रियों को हटाने और सरकार गिरने की बात कही है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

उत्पाद सिपाही भर्ती में मौतों का मुद्दा उठाया

रघुवर दास ने उत्पाद सिपाही भर्ती की दौड़ के दौरान अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि उन्होंने मृत अभ्यर्थियों के परिवारों से मिलने या उन्हें मुआवजा देने की मांग मुख्यमंत्री से क्यों नहीं की।

उन्होंने सरकार से मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।

CID जांच पर भी उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच कर रही CID पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि CID जांच का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाने के बजाय प्रभावशाली लोगों और नौकरशाहों को बचाना तथा साक्ष्य मिटाना प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जिसका वे स्वागत करते हैं। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसी CID की जांच में JSSC-CGL को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई है, तो अब जांच पर भरोसा कैसे किया जाए।

‘दागदार और योग्य अभ्यर्थियों में अंतर जरूरी’

रघुवर दास ने कहा कि किसी भी परीक्षा या नियुक्ति को पूरी तरह रद्द करने से पहले व्यापक जांच जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पहले योग्य और कथित रूप से दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, यदि जांच में व्यापक अनियमितता साबित होती है तभी पूरी नियुक्ति रद्द करना अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने सरकार से JPSC PT और JSSC-CGL से जुड़े मामलों की CBI जांच की सिफारिश करने की मांग की।

रघुवर दास ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच से ही छात्रों के बीच विश्वास बहाल किया जा सकता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो सकती है।

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