JSSC-CGL समेत 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 की CID जांच; परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति
रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने मंगलवार देर रात बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचनाएं जारी कीं। सरकार के फैसले के तहत JSSC-CGL समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, छह परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है और 2010 से 2022 तक की 17 पुरानी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की CID जांच का आदेश दिया गया है।
सरकार का यह फैसला करीब 24 दिनों से चल रहे JPSC-JSSC छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है। आंदोलनकारी छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इससे पहले 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी विवाद सामने आया था और छात्रों ने OMR से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की थी।
22 परीक्षाएं रद्द, 19 में TDPL की भूमिका
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर उन परीक्षाओं पर पड़ा है, जिनमें निजी एजेंसी TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) की भूमिका रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार रद्द की गई 22 परीक्षाओं में 19 परीक्षाएं TDPL के माध्यम से आयोजित हुई थीं। सरकार ने JSSC-CGL को SIT जांच और CID अनुसंधान में सामने आए तथ्यों के आधार पर रद्द किया है तथा TDPL से कराई गई परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया है।
रद्द की गई 22 परीक्षाओं में विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी की नियमित और बैकलॉग भर्ती, ड्रग इंस्पेक्टर, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट विभाग के सहायक प्रोफेसर, सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO, छठी सीमित उप समाहर्ता, JET-2024 और JSSC-CGL शामिल हैं।
CGL में 1,932 पद, चयनित अभ्यर्थियों पर संकट
रद्द की गई सूची में JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL), विज्ञापन संख्या 10/2023 भी शामिल है। अधिसूचना/उपलब्ध विवरण में इस भर्ती के लिए 1,932 पद दर्ज हैं। परीक्षा रद्द होने से चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार CGL के सफल अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो नियुक्त होकर सरकारी सेवा में योगदान भी कर चुके हैं।
इसी कारण सरकार के फैसले के बाद एक नया विरोध भी सामने आया। सफल अभ्यर्थियों ने दावा किया कि यदि कुछ स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों पर भी असर पड़ेगा जिन्होंने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 2,000 सफल CGL अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर चिंता सामने आई है।
11वीं से 13वीं JPSC पर स्थिति क्या है?
भर्ती परीक्षाओं के विवाद में 11वीं से 13वीं JPSC का नाम लगातार सामने आता रहा है। लेकिन यहां तथ्यात्मक अंतर समझना जरूरी है। 18 अगस्त की उपलब्ध सरकारी अधिसूचना में 11वीं से 13वीं JPSC को 22 रद्द परीक्षाओं की सूची में सीधे नहीं रखा गया है। इन परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर पहले से झारखंड हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। अगस्त 2026 में भी इस मामले में सफल 342 अभ्यर्थियों को पक्ष रखने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
अर्थात 11वीं से 13वीं JPSC को “18 अगस्त की 22 रद्द परीक्षाओं में शामिल” बताना सही नहीं होगा। हालांकि छात्र संगठनों ने इन परीक्षाओं को भी जांच/कार्रवाई के दायरे में लाने की मांग की है।
छह परीक्षाएं अगले आदेश तक स्थगित
सरकार ने छह अन्य JPSC भर्ती परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। इनमें—
– फूड एनालिस्ट भर्ती, विज्ञापन संख्या 05/2024
– डिप्टी डायरेक्टर, प्रॉसिक्यूशन भर्ती, विज्ञापन संख्या 03/2025
– प्रोजेक्ट मैनेजर एवं समकक्ष भर्ती, विज्ञापन संख्या 04/2025
– इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज भर्ती, विज्ञापन संख्या 01/2025
– बॉयलर इंस्पेक्टर भर्ती, विज्ञापन संख्या 02/2025
– डायरेक्टर भर्ती, विज्ञापन संख्या 07/2025
शामिल हैं।
सरकार ने इन परीक्षाओं में प्रारंभिक कार्य कराने वाली एजेंसी के Credentials की जांच CID को सौंप दी है। जांच पूरी होने और अगले आदेश तक परीक्षा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
17 पुरानी परीक्षाएं भी CID के रडार पर
सबसे महत्वपूर्ण फैसला उन 17 पुरानी परीक्षाओं को लेकर है, जिनकी संभावित अनियमितताओं की जांच अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID करेगा। सरकारी अधिसूचना में वाणिज्यिक कर (सीमित) परीक्षा, विज्ञापन संख्या 10/2010 से लेकर डेंटल डॉक्टर भर्ती, विज्ञापन संख्या 01/2022 तक की परीक्षाएं शामिल हैं। यानी जांच का दायरा एक दशक से भी अधिक पुराने भर्ती मामलों तक पहुंच गया है।
जांच सूची में प्रमुख रूप से—
5वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा (06/2013), सिविल जज भर्ती (10/2015), सिविल जज विशेष भर्ती (11/2015), मृदा संरक्षण पदाधिकारी (12/2015), सहायक निदेशक कृषि (03/2015), कृषि बैकलॉग भर्ती (04/2015), फूड सेफ्टी ऑफिसर (01/2016), डेंटिस्ट बेसिक कैडर (02/2016), संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग (27/2017), कॉमर्शियल टैक्स लिमिटेड परीक्षा (10/2010), संयुक्त सिविल सेवा-2016 (23/2016), जियोलॉजिस्ट एवं केमिस्ट भर्ती (01/2017 एवं 02/2017), असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (03/2018), सिविल जज नियमित भर्ती (12/2018), संयुक्त सहायक अभियंता भर्ती (05/2019), संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2021 (01/2021) और डेंटल डॉक्टर भर्ती (01/2022) शामिल हैं।
नियुक्त होकर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों का क्या होगा?
सरकार के इस फैसले का सबसे संवेदनशील पहलू यही है। किसी परीक्षा की जांच या परीक्षा रद्द होने का अर्थ यह अपने-आप नहीं है कि उस परीक्षा से नियुक्त हर व्यक्ति की नौकरी तत्काल समाप्त हो जाएगी। किसी नियुक्ति को प्रभावित करने के लिए संबंधित प्रक्रिया में अनियमितता, जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति का निर्धारण जरूरी होगा।
फिलहाल CGL समेत प्रभावित परीक्षाओं से जुड़े सफल और नियुक्त अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ चयनित अभ्यर्थी सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर परीक्षा सुधार तक सरकार का प्लान
सरकार ने केवल परीक्षा रद्द करने और जांच का फैसला नहीं लिया है, बल्कि भर्ती व्यवस्था में संस्थागत सुधार की दिशा में भी कदम उठाने का निर्णय लिया है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार—
पहला, JPSC/JSSC से जुड़ी अनियमितता और कदाचार के मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने हेतु झारखंड हाईकोर्ट से अनुरोध किया जाएगा।
दूसरा, JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की लगातार निगरानी हो सके।
तीसरा, परीक्षा सुधार पर व्यापक अध्ययन के लिए अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति में अन्य अधिकारियों के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशक को भी सदस्य बनाया जाएगा और उसे दो महीने के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
24 दिन के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन जुलाई के अंतिम सप्ताह से तेज हुआ था। आंदोलनकारियों ने 14वीं JPSC समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, JSSC-CGL को रद्द करने, TDPL से संबंधित परीक्षाओं की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। आंदोलन के दौरान छात्रों ने धरना, मशाल जुलूस, भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम भी किए। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन के शुरुआती चरण में छात्र CBI जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
सरकार ने अंततः JSSC-CGL समेत 22 परीक्षाओं को रद्द करने और छह परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला लिया। हालांकि छात्रों की CBI जांच की मांग पूरी नहीं हुई है, इसलिए आंदोलन पूरी तरह समाप्त हुआ है या नहीं, इस पर भी सवाल बना हुआ है। न्यूज़ ऑन AIR की रिपोर्ट में छात्र नेताओं ने कहा कि 11वीं से 13वीं JPSC और CBI जांच जैसी कुछ मांगें अभी लंबित हैं।
अब आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल तीन स्तरों पर है—पहला, रद्द की गई 22 परीक्षाओं का भविष्य क्या होगा और इनसे जुड़े पदों पर दोबारा भर्ती कैसे होगी; दूसरा, पहले से चयनित एवं नियुक्त अभ्यर्थियों की स्थिति क्या होगी; और तीसरा, CID की जांच में किन लोगों और किन प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी सामने आती है।
सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए निगरानी तंत्र और नई व्यवस्था तैयार की जाएगी। वहीं अभ्यर्थियों के एक वर्ग की मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई के साथ निर्दोष सफल उम्मीदवारों के हितों की भी रक्षा हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। 2010 से पुरानी परीक्षाओं की जांच, 22 परीक्षाओं का रद्द होना, छह परीक्षाओं का स्थगन और नई निगरानी व्यवस्था की घोषणा—इन सभी फैसलों का वास्तविक असर CID जांच, न्यायिक प्रक्रिया और सरकार द्वारा प्रस्तावित परीक्षा सुधारों के बाद ही स्पष्ट होगा।










