क्यों खास है दलमा? 193 वर्ग किलोमीटर के जंगल में छिपा है प्रकृति, रोमांच और आस्था का अनोखा संगम

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

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जमशेदपुर: झारखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल Dalma Wildlife Sanctuary अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों की विविधता और धार्मिक महत्व के कारण पर्यटकों को लगातार आकर्षित कर रहा है। लगभग 193 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य राज्य के सबसे महत्वपूर्ण इको-टूरिज्म स्थलों में से एक माना जाता है।

प्रकृति और आस्था का संगम

दलमा की पहाड़ियों पर स्थित शिव मंदिर और दलमा माई मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। यहां स्थित हनुमान मंदिर भी बड़ी संख्या में भक्तों को अपनी ओर खींचता है। पहाड़ की ऊंचाई से दिखाई देने वाला मनोरम दृश्य पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्रदान करता है।

राज्य का एकमात्र हैंगिंग ब्रिज

दलमा में झारखंड का एकमात्र हैंगिंग ब्रिज मौजूद है, जो रोमांच पसंद पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। इसके अलावा वन विभाग यहां पर्यटन सुविधाओं का लगातार विस्तार कर रहा है।

बन रहा है राज्य का पहला हैंगिंग रेस्ट हाउस

पर्यटन को नई पहचान देने के लिए मकुलाकोचा और पिंडराबेड़ा में आधुनिक रेस्ट हाउस बनाए जा रहे हैं। पिंडराबेड़ा में प्रस्तावित हैंगिंग रेस्ट हाउस राज्य का पहला ऐसा अनोखा प्रोजेक्ट होगा। इसके अलावा यहां:

  • जंगल सफारी
  • मड हाउस
  • हिरण पार्क
  • तितली पार्क
  • 3D म्यूजियम
  • 6 ट्री हाउस
  • वॉच टावर

जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

वन्यजीव और जैव विविधता का खजाना

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दलमा के जंगल जैव विविधता से भरपूर हैं। यहां 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां और 200 से अधिक तितलियों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं। प्रमुख पक्षियों में Indian Pitta, Black-naped Monarch और Ferruginous Duck शामिल हैं।

साथ ही गोल्डन एंजल, गाउडी बेरोन और वाटर स्नो फ्लैट जैसी दुर्लभ तितलियां भी यहां देखी गई हैं।

पर्यटन से बढ़ा राजस्व और रोजगार

पिछले वर्ष दलमा में 44 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिससे वन विभाग को लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह पहली बार है जब दलमा से इतनी बड़ी आय दर्ज की गई।

स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से रोजगार मिल रहा है। जंगल से प्राप्त मधु (शहद), महुआ, केंदु और बांस जैसे उत्पादों की बिक्री से ग्रामीणों की आय बढ़ रही है। स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए दलमा बुरु हाट भी संचालित किया जा रहा है।

हाथियों की धरती

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दलमा अभयारण्य की स्थापना 1975 में हुई थी। यह क्षेत्र विशेष रूप से जंगली हाथियों के लिए प्रसिद्ध है और इसे इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। एक समय यहां बाघ और शेर जैसे वन्यजीवों की भी उपस्थिति दर्ज की जाती थी।

प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व, रोमांचक पर्यटन सुविधाएं और समृद्ध जैव विविधता के कारण दलमा आज झारखंड के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

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