फर्जी लाभुकों पर लगेगी लगाम! झारखंड सरकार ला रही नई डिजिटल सत्यापन व्यवस्था

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची: झारखंड सरकार सरकारी योजनाओं का लाभ सही और पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग को लगातार विस्तार दे रही है। इसी क्रम में राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने आधार ऑथेंटिकेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की है।

सरकार का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी लाभुकों की पहचान कर उन्हें लाभ सूची से बाहर करना है। इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद लाभुकों की पहचान बायोमेट्रिक सत्यापन और ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से की जाएगी। इससे फर्जी लाभार्थियों, डुप्लीकेट रिकॉर्ड और गलत भुगतान की संभावनाओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा।

राज्य सरकार इस परियोजना के तहत ऐसा तकनीकी ढांचा विकसित कर रही है, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी तेज और सुरक्षित आधार सत्यापन सुनिश्चित करेगा। कई बार इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी बाधाओं के कारण लाभुकों को समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। नई प्रणाली इन समस्याओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परियोजना को लागू करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से मान्यता प्राप्त लाइव एएसए (Authentication Service Agency) सेवा प्रदाताओं से तकनीकी एवं व्यावसायिक निविदाएं आमंत्रित की हैं। यह प्रक्रिया रिवर्स बिडिंग मॉडल के तहत संचालित की जाएगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल UIDAI द्वारा अधिकृत एजेंसियां ही इस निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की पात्र होंगी। प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए 8.04 लाख रुपये की बीड सिक्योरिटी भी निर्धारित की गई है।

सरकार का विश्वास है कि नई डिजिटल सत्यापन व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभुकों तक समय पर पहुंचेगा, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा और राज्य की ई-गवर्नेंस प्रणाली पहले से अधिक मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।

 

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