संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
रामगढ़: सीसीएल की सयाल कोलियरी में 9 जून को प्रस्तावित 10 हजार टन कोयले की बीडिंग को लेकर कोयला कारोबार जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोयले की बोली किस दर पर खुलेगी और क्या नए कारोबारी इस प्रक्रिया में भाग ले पाएंगे या नहीं। कोयला कारोबार में कथित सिंडिकेट और सीमित प्रतिस्पर्धा को लेकर उठते रहे सवालों के बीच यह बीडिंग बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, बीडिंग में शामिल होने की तैयारी कर रहे कुछ कारोबारियों को कथित तौर पर प्रक्रिया से दूर रहने की चेतावनी मिलने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे बाजार में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार बीडिंग में कितनी कंपनियां हिस्सा लेती हैं और प्रतिस्पर्धा का स्तर क्या रहता है।
जानकारों का कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले तक सयाल कोलियरी की कोयला बीडिंग काफी प्रतिस्पर्धात्मक होती थी। उस समय एक ट्रक कोयले की बोली 4 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए और कई कारोबारी बीडिंग प्रक्रिया से दूर होते चले गए। आरोप है कि ऊंची बोली लगाने वाले कुछ कारोबारियों को कोयला उठाव में परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कई कंपनियों ने रुचि कम कर दी।
प्रतिस्पर्धा घटने के बाद कुछ चुनिंदा कंपनियों का दबदबा बढ़ने की चर्चा रही है। इसका असर बोली की दरों पर भी देखने को मिला। मई माह की अंतिम बीडिंग में कोयले की कीमत लगभग 1506 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई, जिसने बाजार में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार अधिक कंपनियां खुलकर बीडिंग में भाग लेती हैं तो न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि सीसीएल को बेहतर राजस्व भी प्राप्त होगा। वहीं यह बीडिंग इस बात की भी परीक्षा होगी कि कोयला कारोबार में खुली प्रतिस्पर्धा मजबूत होती है या फिर कथित सिंडिकेट की पकड़ बरकरार रहती है।
फिलहाल कोयला क्षेत्र से जुड़े कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और उद्योग जगत की निगाहें 9 जून को होने वाली इस महत्वपूर्ण बीडिंग प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

