📍 रांची / धनबाद
झारखंड में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में कहा कि झारखंड के लोकतांत्रिक इतिहास में यह बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जहां कानून व्यवस्था पर ही सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो में धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल करते हुए पूछा कि क्या राज्य का प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के प्रभाव में काम कर रहा है? उन्होंने कहा कि यदि वीडियो में लगाए गए आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
वीडियो में कथित तौर पर यह आरोप लगाए गए हैं कि गरीब और कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जा कराने की कोशिश की जा रही है, माइनिंग माफियाओं और अधिकारियों के बीच गठजोड़ की आशंका है तथा सत्ता और वर्दी के प्रभाव का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिन अधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपना जनता के बीच गलत संदेश देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह धारणा बनती है कि सत्ता और प्रभाव के सामने न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि सामाजिक तनाव और भय का माहौल न बने, इसलिए उन्होंने वीडियो का केवल संपादित अंश ही सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि पूरा वीडियो मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराया जाएगा ताकि सरकार यह न कह सके कि उसे मामले की जानकारी नहीं थी।
इस मामले में उन्होंने चार प्रमुख मांगें भी रखीं —
- संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- माइनिंग माफिया, भूमि कब्जा और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े आरोपों की न्यायिक निगरानी में जांच हो।
- दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष लगातार सरकार को कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा सकती है।
फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। जनता की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है।








