विधानसभा में सरकार के जवाबों ने खोली जमीनी व्यवस्थाओं की हक़ीक़त : विधायक

संवाददाता

हजारीबाग : भाजपा से हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हजारीबाग से जुड़े जनहित के दो गंभीर मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। विधायक ने कोल साइडिंग से फैल रहे प्रदूषण और सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था को लेकर सरकार से कड़े सवाल पूछे, जिनके जवाबों ने व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। विधायक प्रदीप प्रसाद ने कटकमसांडी और कटकमदाग कोल साइडिंग में फैल रहे प्रदूषण, धूलकण के कारण ग्रामीणों में बढ़ रही बीमारियों और किसानों की फसल पर पड़ रहे दुष्प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों साइडिंग में 100 मीटर दूरी तक कोयले की धूल लोगों के घरों, खेतों और दुकानों तक फैल रही है, जिससे सांस से संबंधित रोग और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने स्वीकार किया कि दोनों साइडिंग में मॉनिटरिंग के लिए पी एम 10 विश्लेषक लगाए गए हैं, 10 फीट ऊंची मेटल शीट, पानी छिड़काव और स्प्रिंकलर जैसी व्यवस्थाए की गई हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण से बीमार हुए किसी भी परिवार की जानकारी विभाग को प्राप्त नहीं है। जमीनी हकीकत किया है ये सभी को पता है। विधायक ने कहा कि सरकार का यह जवाब ही साबित करता है कि प्रदूषण की वास्तविक जमीनी स्थिति का न तो सर्वे किया गया और न ही प्रभावित परिवारों की कोई सहायता सुनिश्चित की गई। विधायक प्रदीप प्रसाद ने यह भी सवाल उठाया कि कोल साइडिंग को हटाने या स्थानांतरित करने की कोई योजना क्यों नहीं है, जबकि वहां से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर धूल का जमाव बना रहता है और राहगीरों के साथ कृषक समुदाय लगातार प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है। सरकार ने अपने जवाब में साइडिंग संचालन को नियम सम्मत बताते हुए भविष्य की किसी ठोस योजना से इनकार कर दिया। दूसरे प्रश्न में विधायक प्रदीप प्रसाद ने हजारीबाग मेडिकल कॉलेज एवं सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था और आउटसोर्सिंग कंपनियों के कर्मचारियों की मनमानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अस्पतालों में नियुक्त आउटसोर्सिंग कर्मी दलालों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और क्या चिकित्सा व्यवस्था अब निजी हाथों में ठेके पर चल रही है। सरकार ने जवाब में यह स्वीकार किया कि अस्पतालों में आउटसोर्सिंग कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन दलाली जैसे व्यवहार की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। विधायक ने कहा कि सरकार की यह अनभिज्ञता ही अस्पतालों की अव्यवस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने ओपीडी की नई ऑनलाइन व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा किया। सरकार ने स्वीकार किया कि ओपीडी की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी बाधाओं के कारण मरीजों को फिर ऑफलाइन पर्ची व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। विधायक ने कहा कि सरकार खुद मान रही है कि उसकी नई प्रणाली सफल नहीं है और ग्रामीण मरीज आज भी लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। विधायक प्रदीप प्रसाद ने दोनों मामलों में सरकार के जवाबों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि हजारीबाग के लोग प्रदूषण और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से परेशान हैं और सरकार केवल कागजों पर व्यवस्था सुधार का दावा करती दिख रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व जनता की समस्या को सदन में उठाना है और वह हजारीबाग के हर नागरिक की आवाज को मजबूती से सरकार के सामने रखते रहेंगे।

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