संचार साथी ऐप को लेकर राजनीतिक हलकों में बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। एक प्रमुख विपक्षी नेता ने ऐप को नागरिकों की निजता पर सीधा हमला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह ऐप लोगों की निजी जानकारियों पर निगरानी करने का प्रयास है और यह एक तरह से जासूसी ऐप की तरह काम करेगा।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस ऐप के ज़रिए नागरिकों की गतिविधियों पर नज़र रखना चाहती है, जबकि साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए पहले से ही सिस्टम मौजूद हैं। नेता ने ताज़ा निर्देशों को आम जीवन में अनावश्यक दखल बताया।
वहीं, सरकार की ओर से साफ किया गया है कि ऐप को अनिवार्य नहीं किया गया है और ज़रूरत पड़ने पर इसे डिलीट भी किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ऐप का उद्देश्य साइबर अपराधों पर रोक लगाना और सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
मामले को लेकर देशभर में बहस जारी है और तकनीकी विशेषज्ञों से लेकर आम नागरिकों तक, ऐप की उपयोगिता और निजता पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।









