संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
संविधान दिवस के अवसर पर देशभर में भारतीय संविधान की महत्ता और इसकी विशिष्टताओं पर चर्चा जोरों पर है। दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान के रूप में भारत का संविधान न केवल विशाल है बल्कि अत्यंत व्यापक, समावेशी और दूरदर्शी भी है। इसके निर्माण से लेकर इसकी मूल संरचना तक, कई तथ्य ऐसे हैं जो इसे अनोखा बनाते हैं।
भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद, 22 भाग, 12 अनुसूचियाँ और 97 संशोधन शामिल हैं, जो इसे दुनिया के सबसे विस्तृत संविधानों में शुमार करते हैं। इसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे—जो भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक असाधारण अध्याय माना जाता है। संविधान की दो हस्तलिखित प्रतियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं, एक हिंदी में और दूसरी अंग्रेजी में।
संविधान की सबसे बड़ी खूबी इसकी दोहरी प्रकृति है—यह संघात्मक (Federal) भी है और एकात्मक (Unitary) भी, जो आपात परिस्थितियों में केंद्र को अधिक शक्तियाँ प्रदान करती है। यही मिश्रित ढांचा भारत को एक सशक्त, एकजुट और विविधताओं से भरे देश के रूप में आगे बढ़ने में मदद करता है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय संविधान समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, समानता और स्वतंत्रता जैसे मूल सिद्धांतों का पोषक है। ये मूल्य महात्मा गांधी की समाजवादी समाज की कल्पना को साकार करने की आधारशिला भी माने जाते हैं।
संविधान दिवस न केवल इन ऐतिहासिक तथ्यों को याद करने का अवसर है, बल्कि नागरिकों के लिए अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का भी संदेश देता है। भारतीय संविधान अपनी व्यापकता, संतुलन और दूरदर्शिता के कारण दुनिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में एक प्रेरणा स्तंभ बना हुआ है।









