संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के औपचारिक समापन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्वजारोहण समारोह संपन्न होने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। AIMIM नेता वारिस पठान ने बयान दिया कि उनके समुदाय की नज़र में अयोध्या में “मस्जिद थी, है और क़यामत तक रहेगी।” इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तनातनी बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
पीएम मोदी के ध्वजारोहण के बाद आया विवादित बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर के औपचारिक समापन के अवसर पर विशेष ध्वज फहराया। इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने देशवासियों को संबोधित किया। लेकिन इसके तुरंत बाद AIMIM नेता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पूरे देश के PM हैं, किसी एक समुदाय के नहीं। उन्होंने कहा कि PM मोदी संविधान की शपथ लेकर आए हैं और ऐसे बयानों या क्रियाकलापों से यह संदेश जाना गलत है कि वे सिर्फ एक समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
“मस्जिद थी और क़यामत तक रहेगी” – बयान से बढ़ी गर्मी
वारिस पठान ने कहा कि उनका समुदाय आज भी मानता है कि जिस स्थान पर राम मंदिर बनाया गया, वहां पहले मस्जिद थी। उन्होंने दावा किया कि यह विश्वास “क़यामत तक” रहेगा। इस बयान को कई राजनीतिक दलों ने उकसाने वाला और माहौल बिगाड़ने वाला बताया।
BJP की तीखी प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने वारिस पठान के बयान की कड़ी आलोचना की। पार्टी की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी इस प्रकार के बयान समाज में विभाजन पैदा करने वाले हैं। BJP प्रवक्ताओं ने AIMIM पर “तुष्टिकरण की राजनीति” करने का आरोप लगाया।
AIMIM ने किया बचाव
AIMIM के नेताओं ने स्पष्ट किया कि वारिस पठान का बयान किसी को भड़काने के लिए नहीं, बल्कि संविधान के तहत अभिव्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह समुदाय की मान्यता और भावनाओं को व्यक्त करता है, जिसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
पठान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड शुरू हो गया। एक वर्ग ने इसे साम्प्रदायिक बयान बताया, जबकि दूसरे वर्ग ने कहा कि धार्मिक मान्यता रखना हर नागरिक का अधिकार है।
राजनीतिक तापमान फिर उफान पर
अयोध्या मुद्दा लंबे समय से राजनीति का संवेदनशील केंद्र रहा है। मंदिर निर्माण के बाद यह माना जा रहा था कि इस मुद्दे पर माहौल शांत हो जाएगा, लेकिन AIMIM नेता के ताज़ा बयान ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बयान कई राजनीतिक मंचों पर गूंजेगा और दलों के बीच नए विवादों को जन्म दे सकता है।








