भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत वर्ष 1960 में फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से की थी। शुरुआती दौर में संघर्ष और धीरे-धीरे पहचान बनाने के बाद उनका करियर नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब उन्हें वर्ष 1966 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘फूल और पत्थर’ मिली।
यह फिल्म उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई। दर्शकों ने उन्हें पहली बार एक सधे हुए, सशक्त और प्रभावशाली नायक के रूप में पहचाना। फिल्म की सफलता ऐसी रही कि वह रातों-रात सुपरस्टार बन गए। इसी दौर में उन्हें उनकी मजबूत काया, दमदार आवाज़ और एक्शन शैली की वजह से ‘ही-मैन’ का लोकप्रिय खिताब मिला।
इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को अनेक यादगार और सुपरहिट फिल्में दीं—
शोले
चुपके-चुपके
सीता और गीता
धर्म वीर
प्रतिज्ञा
अनपढ़
इन फिल्मों ने न केवल उनकी अभिनय क्षमता को स्थापित किया, बल्कि दर्शकों के दिलों में एक स्थायी जगह भी बनाई।
उनका फिल्मी सफर सादगी, मेहनत और समर्पण का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा गर्व और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।









