चकाई में नहीं चली एनडीए की लहर, नीतीश कैबिनेट के मंत्री सुमित सिंह को करारी हारसंथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

झारखंड सीमा से सटे बिहार के चकाई विधानसभा क्षेत्र में इस बार एनडीए की लहर पूरी तरह बेअसर साबित हुई। नीतीश कुमार सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रहे सुमित कुमार सिंह को चुनाव में अप्रत्याशित रूप से हार का सामना करना पड़ा। राजद प्रत्याशी सावित्री देवी ने 80,357 वोट हासिल कर स्पष्ट जीत दर्ज की, जबकि जदयू उम्मीदवार सुमित कुमार सिंह को 67,385 मत ही मिले।

चकाई की राजनीति लंबे समय से दो परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है—एक ओर स्वर्गीय नरेंद्र सिंह का परिवार, जिसके प्रतिनिधि सुमित कुमार सिंह हैं, और दूसरी ओर फाल्गुनी प्रसाद यादव का परिवार, जिनकी विरासत अब उनकी पत्नी सावित्री देवी संभाल रही हैं। चुनाव परिणामों ने एक बार फिर साबित किया कि क्षेत्र की राजनीति में यही दो परिवार निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

सुमित कुमार सिंह का चकाई से पुराना और गहरा राजनीतिक संबंध रहा है। 2010 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। 2015 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में एक बार फिर निर्दलीय जीत दर्ज कर वे विधानसभा पहुँचे और बाद में नीतीश कैबिनेट में मंत्री बने। उनके पिता स्व. नरेंद्र सिंह भी बिहार में कई सरकारों में मंत्री रह चुके थे और प्रदेश राजनीति के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे।

चकाई सीट के महत्व का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि नीतीश मंत्रिमंडल के 29 में से 28 मंत्री चुनाव जीतने में सफल रहे, केवल जदयू कोटे के मंत्री सुमित कुमार सिंह को ही पराजय झेलनी पड़ी। वहीं भाजपा और जदयू के बाकी मंत्रियों ने शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा के विजयी मंत्रियों में सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडे, रेणु देवी और जिवेश कुमार सहित अन्य नाम शामिल हैं, जबकि जदयू के 12 मंत्रियों में से 11 ने जीत हासिल की।

चकाई में एनडीए की हार को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों, परिवारों की पारंपरिक पकड़ और मतदाताओं के रुझान का परिणाम माना जा रहा है। भाजपा–जदयू गठबंधन की व्यापक जीत के बीच चकाई का परिणाम चर्चा का केन्द्र बना हुआ है।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

Leave a Comment

और पढ़ें