साहिबगंज/पाकुड़। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण आजीविका योजना जोहार परियोजना (Jharkhand Opportunities for Harnessing Rural Development) संथाल परगना के ग्रामीण अंचलों में किसानों की जिंदगी में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विश्व बैंक द्वारा समर्थित यह योजना विशेष रूप से कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन के माध्यम से आजीविका बढ़ाने पर केंद्रित है।
परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) को दी गई है। संस्था के अनुसार साहिबगंज और पाकुड़ ज़िलों में अब तक हजारों ग्रामीण परिवारों को इस योजना से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है।
✅ महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार
गांवों में स्वयं सहायता समूह (SHGs) को जोहार के तहत न सिर्फ कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि बाज़ार से जोड़ने का मार्ग भी उपलब्ध कराया गया है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है और परिवारों की आय में 35 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।
🌱 पाकुड़: उद्यानिकी और बकरीपालन ने बढ़ाई आय
पाकुड़ वन क्षेत्र से सटे गाँवों में उद्यानिकी और बकरीपालन किसानों के लिए बड़ा सहारा बनते जा रहे हैं।
- ड्रिप सिंचाई और आधुनिक खेती तकनीक के उपयोग से फसल उत्पादन बढ़ा है।
- बकरी नस्ल सुधार कार्यक्रम ने किसानों को कम लागत में अधिक लाभ की सुविधा प्रदान की है।
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले जहाँ किसान धान-मक्का पर निर्भर थे, अब वे सब्ज़ी उत्पादन और बागवानी में अधिक लाभ देख रहे हैं।
🐟 साहिबगंज: मत्स्य पालन का उभरता हब
गंगा और उसके तटवर्ती इलाकों के कारण साहिबगंज जिले में मछली उत्पादन में तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है।
- गांव स्तर पर कई मत्स्य समूह गठित किए गए हैं
- तालाबों के जीर्णोद्धार और वैज्ञानिक पद्धति से पालन को बढ़ावा दिया गया
स्थानीय मछुआरों के अनुसार, पहले जहाँ उत्पादन केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित था, वहीं अब वे बाज़ार में अच्छी कमाई कर रहे हैं।
📊 आंकड़ों की भाषा में विकास
जिला लाभान्वित परिवार प्रमुख लाभ
साहिबगंज 3000+ मत्स्य एवं कृषि आधारित आय में वृद्धि
पाकुड़ 2500+ उद्यानिकी और पशुपालन से बेहतर आय
परियोजना के अंतर्गत किसानों को सशक्त बनाने हेतु वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
🔹 सरकार का दावा
“जोहार परियोजना का लक्ष्य है — गाँव मजबूत, किसान खुशहाल और महिलाएँ आत्मनिर्भर।”
ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से कार्य जारी रहा तो साहिबगंज एवं पाकुड़ जिले आने वाले वर्षों में ग्रामीण समृद्धि के मॉडल ज़िले बनकर उभरेंगे।
जोहार परियोजना ने यह साबित किया है कि सही नीति और सही मार्गदर्शन मिलने पर गाँव की धरती ही सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन सकती है।
इन जिलों में विकास की नई रोशनी जग चुकी है —
और किसान कह रहे हैं — यही है असली जोहार। 🌾✨









