संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
आज देशभर में “पुलिस स्मृति दिवस” (Police Commemoration Day) बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। यह दिन उन वीर पुलिसकर्मियों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा, शांति और जनसेवा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
हर वर्ष 21 अक्तूबर को मनाया जाने वाला यह दिवस भारतीय पुलिस बल के गौरवशाली इतिहास और बलिदान की अमर गाथा को याद दिलाता है।
???????? बलिदान की वह कहानी जिसने जन्म दिया ‘पुलिस स्मृति दिवस’
वर्ष 1959 में इसी दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में भारतीय पुलिस के 10 बहादुर जवानों ने चीनी सेना के हमले के सामने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए थे।
उनकी वीरता और बलिदान की याद में इस दिन को “पुलिस स्मृति दिवस” के रूप में मनाने की परंपरा आरंभ हुई।
????♂️ शहादत को नमन, सेवा को सलाम
इस अवसर पर देशभर के पुलिस स्मारकों पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।
झारखंड के विभिन्न जिलों — रांची, दुमका, पाकुड़, साहिबगंज और जमशेदपुर में स्मृति परेड और मौन श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए गए।
पुलिस अधिकारी और जवानों ने अपने शहीद साथियों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और राष्ट्र सेवा के संकल्प को दोहराया।
????️ “बलिदान की यह गाथा सदा अमर रहे”
इस अवसर पर संथाल हूल एक्सप्रेस के संपादक भूपेन्द्र सिंह ने कहा —
“पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में देश की रक्षा और जनसेवा में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
उनका कर्तव्य, अनुशासन और बलिदान ही राष्ट्र की सुरक्षा की नींव है। पुलिस स्मृति दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के पीछे हजारों अनकही कहानियाँ और वीरता के अध्याय छिपे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह दिवस केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि नए संकल्प का अवसर भी है — “हम अपने पुलिसकर्मियों के त्याग और समर्पण को कभी भुला नहीं सकते।”
???? झारखंड में भी कार्यक्रमों की गूंज
पाकुड़ में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से पुलिस लाइन परिसर में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
साहिबगंज में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल केवल कानून-व्यवस्था की रखवाली नहीं करता, बल्कि जनजीवन की सुरक्षा और आपसी सौहार्द का रक्षक भी है।
“पुलिस स्मृति दिवस” हमें यह याद दिलाता है कि जब भी संकट आया, भारतीय पुलिस ने अपने कर्तव्य पथ से कभी पीछे नहीं हटे।
उनके त्याग, समर्पण और सेवा को प्रणाम करते हुए आज पूरा देश कहता है —
“वो जिंदा हैं हमारी सांसों में, जिनकी कुर्बानी ने देश को सुरक्षित बनाया।”










