???? नेताजी सुभाषचंद्र बोस के ऐतिहासिक संकल्प को नमन — आज ही के दिन हुई थी आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना ????

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क रिपोर्ट

आज का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
ठीक इसी दिन वर्ष 1943 में महान स्वतंत्रता सेनानी और आज़ाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में “आज़ाद हिंद सरकार” (Provisional Government of Free India) की स्थापना की थी।

यह दिन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता की अदम्य भावना का प्रतीक है।


???????? “दिल्ली चलो” के उद्घोष के साथ उठी आज़ादी की लहर

21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के सैनिकों और प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया था।
उन्होंने घोषणा की थी —

“भारत की स्वतंत्रता हथियारों के बल पर ही संभव है, और आज़ाद हिंद फौज उसका अग्रदूत बनेगी।”

इस अवसर पर उन्होंने प्रसिद्ध नारा दिया —

“जय हिंद” और “दिल्ली चलो”,
जो आगे चलकर पूरे राष्ट्र की पुकार बन गया।


⚔️ स्वतंत्र भारत की पहली वैकल्पिक सरकार

नेताजी द्वारा गठित “आज़ाद हिंद सरकार” उस समय जापान, जर्मनी, इटली और कई अन्य देशों द्वारा मान्यता प्राप्त थी।
सरकार की राजधानी सिंगापुर में थी और इसने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर तिरंगा फहराकर भारत की स्वतंत्रता की घोषणा की थी।

यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय नेता ने विदेशी भूमि पर स्वतंत्र भारत की सरकार बनाकर ब्रिटिश साम्राज्य को खुली चुनौती दी थी।


???? नेताजी का अमर योगदान

नेताजी सुभाषचंद्र बोस न केवल एक कुशल सेनानायक थे, बल्कि एक महान रणनीतिकार और दूरदर्शी नेता भी थे।
उनका उद्देश्य केवल भारत की आज़ादी नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण, समान और सशक्त भारत का निर्माण करना था।
उनका प्रसिद्ध कथन —

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”
आज भी हर देशभक्त भारतीय के हृदय में जोश भर देता है।


????️ श्रद्धांजलि और संकल्प

आज, 21 अक्तूबर को देशभर में नेताजी के इस ऐतिहासिक कार्य को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि दी गई और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।

संथाल हूल एक्सप्रेस के संस्थापक भूपेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर कहा —

“नेताजी सुभाषचंद्र बोस का योगदान भारत के इतिहास का वह अध्याय है, जिसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने की नींव रखी।
उनकी दूरदृष्टि और वीरता से प्रेरणा लेकर हमें आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”


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